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उगते सूरज को अर्घ्य देने के साथ महापर्व डाला छठ का हुआ समापन, सीताकुंड धाम पर महिलाओं ने पति व पुत्र के लिए की मंगल कामना

उगते सूरज को अर्घ्य देने के साथ महापर्व डाला छठ का हुआ समापन, सीताकुंड धाम पर महिलाओं ने पति व पुत्र के लिए की मंगल कामना

केएमबी मोहम्मद अफसर 

सुल्तानपुर। जिले में डाला छठ का महापर्व महिलाओं ने पूरे जोश एवं हर्ष उल्लास के साथ मनाया। आदि गंगा गोमती के पावन तट पर उगते हुए सूर्य को अर्घ देने के पश्चात डाला छठ महापर्व व्रत का समापन हो गया। इस दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह का कोई कष्ट न होने, जिला प्रशासन के साथ-साथ तमाम समाजसेवी संगठन अपने अपने शिविर के माध्यम से सीता कुंड धाम धाम पर तैनात रहे। छठ महापर्व के दौरान सीता कुंड धाम पर चप्पे-चप्पे पर प्रशासन की नजर रही। डाला छठ पर्व को लेकर बहुत ही उत्साह देखने को मिला। रविवार की शाम को भक्तों ने डूबते हुए सूरज को अर्ध दिया तो वही सोमवार को सुबह उगते हुए सूरज को देकर अपने पति अपने बेटे के लिए मांगे लंबी दुआएं साथ ही परिवार के लिए मंगल कामना की। डाला छठ का पावन पर्व 36 घंटे का होता है। महिलाएं 2 दिन पहले ही उपवास रखकर अपने पति की लंबी आयु व पुत्र प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। डूबते हुए सूरज को अर्घ्य देकर उगते हुए सूरज को अर्घ्य देकर उपवास तोड़ती हैं। डाला छठ के पावन पर्व पर गोमती मंडल परिवार 2 दिन पहले से सफाई व्यवस्था को लेकर मुस्तैद हो जाता है। जब तक महिलाएं पूजा-पाठ न करें तब तक वहां पर अपनी पूरी जिम्मेदारी से मौजूद रहते हैं। वही गोमती मंडल के सक्रिय सदस्य दिनकर प्रताप सिंह ने बताया कि हम गोमती मंडल परिवार एक दिन पहले से यहां पर मुस्तैद रहते हैं। साथ ही आने वाले श्रद्धालुओं को और यहां पर पूजन कर रही महिलाओं के लिए कोई दिक्कत न होने पाए व महिलाओं के नहाने के लिए कपड़े बदलने के लिए व्यवस्था भी की गई। गोमती मित्र मंडल के अलावा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अन्य कई समाजसेवी संगठन क्षेत्र के सम्मानित जनप्रतिनिधि सीताकुंड धाम पर सक्रिय रहे।

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