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बहुचर्चित ग्रामपंचायत ओदरा के प्रधान का नवीन पंचायत भवन से संबंधित जमीन का प्रस्ताव निरस्त

बहुचर्चित ग्रामपंचायत ओदरा के प्रधान का नवीन पंचायत भवन से संबंधित जमीन का प्रस्ताव निरस्त

केएमबी रुखसार अहमद 
सुल्तानपुर। जिले की दुबेपुर ब्लॉक की चर्चित ग्रामपंचायत ओदरा में पंचायत भवन होने के बावजूद ग्रामप्रधान द्वारा चकबंदी के दौरान नए पंचायत भवन निर्माण के लिए जमीन आरक्षित करने के लिए चकबंदी कर्मियों की मिलीभगत से प्रस्ताव देकर पास करा लिया गया था। ग्राम प्रधान द्वारा जिस गाटा संख्या 191 को बंजर भूमि दिखाकर प्रस्ताव पास कराया गया था, दरअसल खाते की है जो मौके पर मतरूक हो गई है जिसका न्यायालय चकबंदी अधिकारी फर्स्ट के यहां मोहम्मद अब्बास बनाम सरकार मामला विचाराधीन है। चकबंदी अधिकारी द्वारा जांच उपरांत नवीन ग्राम पंचायत की जमीन संबंधी प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया है। बताते चलें ग्राम पंचायत में 1995 से 2000 के प्रधानी के कार्यकाल में गाटा संख्या 822 में निर्माण कराया गया था जिसको उपयोग में लिया जा रहा था। वर्ष 2010 तक पंचायत का कार्य इसी पंचायत भवन से किया जाता था। यहां तक कि 2010 से पहले इसी पंचायत भवन को लोकसभा, विधानसभा व ग्राम पंचायत के चुनाव में मतदान केंद्र भी बनाया जाता रहा है लेकिन वर्ष 2010 के बाद पंचायत भवन ग्राम प्रधान की उपेक्षा का शिकार हो गया और दिन प्रतिदिन उपेक्षा के कारण इसकी दशा आज बहुत ही दयनीय हो गई है। ग्राम प्रधान द्वारा उचित रखरखाव न किए जाने के कारण इस पंचायत भवन का खिड़की व दरवाजा तक गायब हो गया। यदि इस पंचायत भवन के मरम्मत के प्रति ग्राम प्रधान संवेदनशील हो तो मरम्मत के उपरांत पंचायत भवन उपयोग में लाया जा सकता है और लाखों रुपए की ग्राम पंचायत की क्षति होने से भी बच सकती है। ग्रामीणों की भी मांग है कि यह पंचायत भवन ग्राम पंचायत के मध्य में बना हुआ है। गांव के मध्य में पंचायत भवन होने के नाते ग्रामवासियों को कोई दिक्कत नहीं होती है लेकिन वर्तमान प्रधान द्वारा ग्राम पंचायत के अंत में नया पंचायत भवन बनाने से लोगों को आने जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान अपने स्वयं के फायदे के लिए अपने घर के सामने पंचायत भवन बनवाने पर अड़े हैं। फिलहाल चकबंदी अधिकारी ने नए पंचायत भवन के जमीन को आरक्षित करने संबंधी प्रस्ताव को निरस्त कर ग्राम प्रधान के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। अब देखना है कि ग्राम प्रधान द्वारा पुराने पंचायत भवन का मरम्मत कराकर उसे उपयोग में लाया जाता है अथवा ग्राम प्रधान नए पंचायत भवन के लिए जमीन आरक्षित करने हेतु कोई नया हथकंडा अपनाते हैं।

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