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कुरई कॉलेज में मनाई गई क्रांति ज्योति सावित्रीबाई फुले की 195 वी जयंती

कुरई कॉलेज में मनाई गई क्रांति ज्योति सावित्रीबाई फुले की 195 वी जयंती

केएमबी नीरज डेहरिया
सिवनी। शासकीय महाविद्यालय कुरई में स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ व राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वाधान में भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की 195 वी जयंती मनाई गई । कार्यक्रम की शुरुआत में सावित्रीबाई फुले की छायाचित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए । इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक जे पी मरावी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि नारी मुक्ति आंदोलन की प्रणेता एवं देश की पहली महिला शिक्षिका और महान समाजसेवी सावित्रीबाई फुले की जयंती पर कोटि-कोटि नमन । आज ही के दिन 1831 में जन्मी सावित्रीबाई फुले ने लड़कियों की शिक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया ,जब समाज में महिलाओं के शिक्षा पाने की अधिकार की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। कार्यक्रम प्रभारी प्रो पंकज गहरवार ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने 1848 में महाराष्ट्र के पुणे में देश का पहला बालिका स्कूल की स्थापना की। इसे देश में लड़कियों का पहला स्कूल माना जाता है । फुले दंपति ने 18 स्कूल खोले । उन्होंने कहा कि सभी विद्यार्थी स्वयं का विस्तार करें ताकि समाजहित के कार्यों को करने की सोच हमारे अंदर विकसित हो । अपने अंदर के भाव के निर्माण में ऐसी महान विभूतियों का ध्यान मददगार साबित होगा। जागो, उठो, शिक्षित बनो, परम्पराओं को तोड़ो आजाद करो। सावित्री बाई फुले ने कहा था स्वाभिमान से जीने के लिए पढ़ाई करो, पाठशाला ही इंसानों का सच्चा गहना हैं। कॉलेज में अध्ययनरत छात्रा योगिता ठाकुर ने अपने विचार रखते हुए कहा कि, क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत है और हम सभी छात्राओं के को उनसे प्रेरणा लेकर अपनी क्षमताओं को बढ़ाकर, निरंतर उनके विचारों का आचरण करते हुए, जीवन में अपना मुकाम हासिल करना है। छात्रा रिमिता शर्मा ने कहा कि देश की प्रथम महिला अध्यापिका, समाज सेविका सावित्री बाई फुले ने जीवन पर्यंत महिलाओं के उत्थान, स्वावलंबन तथा शिक्षा के लिए संघर्ष किया, यह सभी के लिए आज भी प्रेरणादाई हैं। आयोजन की व्यवस्था को बनाने में योगिता ठाकुर, अश्विनी खरे, पलक ठाकुर,रिमिता शर्मा,शुभम भलावी, श्रेयांश अहिरवार,अदीबा खान,सोनिया आदि का योगदान रहा। 
"नारी का भी हो सदा, शिक्षा पर अधिकार, 
नारी पढ़ लिख कर करे, दो कुल का उद्धार"
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