सिमरा शेखपुरा घाट पर अवैध रेता खनन पर प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में
उरई (जालौन)। तहसील कालपी क्षेत्र स्थित यमुना नदी की तलहटी में अवैध बालू खनन का खुला खेल जारी है। सिमरा शेखपुरा स्थित गाटा संख्या 117/1, खंड संख्या-1 पर संचालित बालू घाट पर न केवल खनिज नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, बल्कि पर्यावरणीय मानकों को भी ठेंगा दिखाया जा रहा है।विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार श्री बालाजी एसोसिएट के नाम से पंजीकृत यह घाट, जिसे 11 हेक्टेयर क्षेत्र में 8 दिसंबर 2025 से 7 दिसंबर 2030 तक खनन की स्वीकृति दी गई है, नियमों के विपरीत पूरी तरह मैकेनाइज पद्धति से चलाया जा रहा है। भारी पोकलेन मशीनों की आवाज़ें दिन-रात यमुना के शांत बहाव को चीरती सुनाई देती हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि खंड संचालक द्वारा अत्यधिक खनन कर न केवल नदी की धारा बदली जा रही है बल्कि भूक्षरण, जलस्तर में गिरावट और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो रही हैं। वहीं धर्मकांटा पर ओवरलोडिंग का खेल भी खुलेआम जारी है, जिससे राजस्व का नुकसान और सड़क सुरक्षा को खतरा बढ़ गया है।पर्यावरण मंत्रालय की स्पष्ट गाइडलाइन है कि उत्तर प्रदेश में बालू खनन केवल सेमी मैकेनाइज पद्धति से ही किया जा सकता है, लेकिन जिला खनन अधिकारी और प्रशासनिक अमला इस खुले उल्लंघन पर अब तक मौन है।स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लोगों का कहना है कि यह चुप्पी कहीं-न-कहीं मिलीभगत की ओर इशारा करती है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कब अवैध खनन माफियाओं पर नकेल कसेगी सरकार और क्या यमुना नदी को बचाने के लिए प्रशासन कोई ठोस कदम उठाएगा, या फिर यह लूट यूं ही बदस्तूर जारी रहेगी।
ब्रजेश कुमार बादल
दैनिक किसान मजदूर भवाना न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
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