शासकीय महाविद्यालय कुरई में बसंतोत्सव एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मनाई गई जयंती
ज्ञान की ज्योति जले हर दिल में,
अज्ञान का अंधेरा दूर हो जाए
सिवनी। शासकीय महाविद्यालय कुरई में राष्ट्रीय सेवा योजना,स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन योजना और भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वाधान में 23 जनवरी को बसंत पंचमी पर्व और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पराक्रम दिवस के रूप में मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के पूजन अर्चन और दीप प्रज्वलन से हुई। इसके साथ ही मां सरस्वती और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। छात्रा खुशी डहरवाल ने मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की। तत्पश्चात भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ राजेंद्र कटरे ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्या, ज्ञान, कला और बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की आराधना के पावन पर्व बसंत पंचमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। कार्यक्रम का संचालन करते हुए राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी प्रो पंकज गहरवार ने कहा की तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा,जय हिंद, दिल्ली चलो जैसे करिश्माई नारे से देश की आजादी की लड़ाई को नई ऊर्जा देने वाले और अपने स्वाभिमान, दृढ़ता,संगठन कार्यों के माध्यम से भारत राष्ट्र की आज़ादी का मार्ग प्रशस्त करने वाले अमर स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस जी की जयंती पर उन्हें कृतज्ञ नमन। इतिहास विभाग प्रमुख प्रो पवन सोनिक ने कहा की यह दिन नेताजी की अदम्य भावना और राष्ट्र के लिए निस्वार्थ सेवा को सम्मानित करने और याद करने के लिए मनाया जाता हैं। छात्रा माही श्रीवास ने अपने भाषण में बताया की नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में हुआ। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पराक्रम दिवस के अवसर पर कॉलेज के विद्यार्थियों ने प्रो अग्रता स्वामी के मार्गदर्शन में उत्साह से पोस्टर प्रतियोगिता में सहभागिता की। अलीशा खान ,माही श्रीवास,अंकित गाढ़ेकर,निखिल भलावी,स्नेहा बरमैया, गौरव मातरे,चारु सिंगारे, विशाखा उइके ने पोस्टर बनाकर भारतवासियों को देशप्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान प्रो जेपी मरावी, प्रो अग्रता स्वामी, प्रो पवन सोनिक, डॉ मधु भदौरिया, डॉ राजेंद्र कटरे, रामप्रसाद डेहरिया इत्यादि की उपस्थिति रही।
दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त,
मेरी मिट्टी से भी खुशबू ए वतन आएगी।
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