तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पार्टी के भीतर बगावती सुर तेज
पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी के भीतर बगावती सुर तेज हो गए हैं। इसका सीधा निशाना पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी बने हैं। हार के बाद टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी है, जो अब खुलकर सामने आ रही है। नेताओं ने अभिषेक बनर्जी द्वारा चुनावी प्रबंधन के लिए प्रशांत किशोर की संस्था आई-पैक पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने की आलोचना की है। आरोप है कि इससे पार्टी के पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई। पार्टी के अंदर से यह भी शिकायतें आ रही हैं कि अभिषेक ने टीएमसी को एक 'कॉर्पोरेट कंपनी' की तरह चलाया, जिससे जमीनी स्तर के नेताओं और नेतृत्व के बीच की कड़ी टूट गई। पार्टी के कुछ नेताओं ने उनके 'घमंडी व्यवहार' और पार्टी के भीतर गुटबाजी (lobbying) को बढ़ावा देने के आरोप लगाए हैं, जिससे हार का सामना करना पड़ा। दिग्गज नेताओं और विधायकों का मानना है कि उनके अनुभवों को डेटा और एल्गोरिदम (आई-पैक) के सामने नीचा दिखाया गया। अभिषेक बनर्जी ने चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं और बीजेपी पर चुनाव में अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी के एक 'मजबूत और मुखर विपक्ष' के रूप में काम करने का दावा किया है। TMC के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती आंतरिक विद्रोह को शांत करना और अपनी खोई हुई जमीन वापस पाना है, जबकि अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।
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