शोहदा-ए-इस्लाम के जलसे को लेकर बैठक सम्पन्न

शोहदा-ए-इस्लाम के जलसे को लेकर  बैठक सम्पन्न

केएमबी रुक्सार अहमद
 
 सुल्तानपुर।  29 जुलाई 2022 को इस्लामिक नववर्ष मुहर्रम महीने पाक पर्व को लेकर जिले के खैराबाद स्थित मदरसा जामिया इस्लामिया के मीटिंग हाल में एक मीटिंग का आयोजन हुआ। मीटिंग मदरसा के नाजिम -ए-आला सदर मौलाना मुहम्मद उस्मान कासमी की सदारत (अध्यक्षता)में हुई। मीटिंग की शुरूआत मदरसे का एक स्टूडेंट हाफिज इसहाक ने कुरान करीम की तिलावत से की उसके बाद मौलाना मुहम्मद अशरफ साहब ने इस्लाम के लिए जद्दोजहद कर अपने जान को कुर्बान करने वाले शहीदों की याद में नज्म पेश किया। मीटिंग में शहर के तमाम उलेमा हजरात एव अहम शख्सियत के लोग शामिल हुए। मीटिंग का मुख्य मुद्दा मुहर्रम महीने में जामिया इस्लामिया मदरसा के परिसर में हर साल शोहदा-ए-इस्लाम के जलसे का प्रोग्राम होता है। मीटिंग जलसे को कामयाब बनाने को लेकर थी। 
मौलाना मुहम्मद उस्मान कासमी ने बताया कि जलसा बिगत 15 वर्षो से हो रहा है। पहली मुहर्रम से 10वी मुहर्रम तक मुसल्सल 10 दिनों तक जलसा बाद मग़रिब नमाज मुनक़्क़द किया जाता है जिसमे देश प्रदेश से मशहूर उलेमा हजरात तसरीफ लाते है। अहले सुन्नत वल जमात के अकीदे के मुताबिक बयान करते है। कोरोना संक्रमण के सावधानी के चलते दो साल से जलसा का आयोजन ऑनलाइन हो रहा था। इस साल 2022 में मदरसा कमेटी ने फैसला किया है कि जलसा इस बार से पहले की तरह ऑफलाइन शुरू किया जाएगा जिसकी सूचना प्रशासन को दी जा चुकी है। उसी को लेकर तमाम मौलानाओं और शहरवासियों ने शुक्रवार को मग़रिब नमाज बाद मीटिंग में जलसा को कामयाब बनाने के लिए अपने अपने विचार रखे।मीटिंग को खेताब करते हुए मौलाना मोहम्मद कसीम कासमी ने जलसे को कामयाब बनाने के लिए नौजवानों से अपील किया कि आप ही लोगो के कंधे पर जिम्मेदारी है। उन्होंने इस्लामी तारीख में अल्लाह के एहकामो की पाबंदी के लिए हक की राह में शहीदों की पेश की गई कुर्बानियों के बारे में तफसील से बताया।मौलाना अबरारूल हक अलिफ फहमी ने भी शोहदा-ए-इस्लाम के बारे मे लोगो से खेताब किया।
मौलाना मकबूल खान कासमी ने जलसे के प्रोग्राम की तैयारियों को लेकर मदरसे की स्टाफ को अपने अपने कामो को जिम्मेदारी से निभाने की अपील की। इस मौके पर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रवक्ता व समाज सेवी निज़ाम खान, राशिद खान, मुहम्मद इरफान, मुफ़्ती तौफीक, मुफ़्ती मुहम्मद जमीर, मौलाना अब्दुल वहीद हाफिज मुहम्मद अहमद, महताब अहमद अनस सिद्दीकी, शमशाद राईनी शहजाद राईनी इत्यादि लोग मौजूद रहे।

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