मकर संक्रांति पर नदी स्नान: परंपरा, प्रकृति और जागरूकता का पुनर्जागरण घर सुल्तानपुर फाउंडेशन की मुहिम
सुल्तानपुर। मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर नदियों में स्नान की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। नदी स्नान को शारीरिक शुद्धि के साथ-साथ मानसिक और आध्यात्मिक शांति का माध्यम माना गया है।
आज के समय में नदियाँ प्रदूषण की मार झेल रही हैं और समाज, विशेषकर युवाओं का जुड़ाव नदियों व प्रकृति से धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। इसी चिंता और जिम्मेदारी के भाव से घर सुल्तानपुर फाउंडेशन ने एक जागरूकता अभियान का आह्वान किया है।
फाउंडेशन की ओर से अपील की जाती है कि 15 जनवरी, मकर संक्रांति के दिन देश-प्रदेश में जहां भी लोग हों, वहां की नदी में स्नान करें। यह केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि नदियों के महत्व को समझने, उनके संरक्षण के प्रति संवेदनशील होने और समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने का प्रयास है।
नदी स्नान का महत्व केवल आस्था तक सीमित नहीं है। नदियाँ हमारी सभ्यता की जननी रही हैं—कृषि, जीवन, संस्कृति और परंपराओं की आधारशिला। जब समाज स्वयं नदियों से जुड़ेगा, तभी उनके संरक्षण की भावना भी मजबूत होगी।
इस अभियान के अंतर्गत सभी प्रतिभागियों से आग्रह है कि वे अपने नदी स्नान की तस्वीरें घर सुल्तानपुर फाउंडेशन के साथ साझा करें, ताकि यह संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे और युवाओं को प्रकृति एवं पुरातन संस्कृति से जोड़ने की यह मुहिम एक स्वच्छता जागरूकता जन-आंदोलन का रूप ले सके।
घर सुल्तानपुर फाउंडेशन का विश्वास है कि छोटी-छोटी सामूहिक पहलें ही बड़े बदलाव की नींव रखती हैं। मकर संक्रांति के इस पावन पर्व पर आइए, हम सभी नदियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं और अपनी सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करें।
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