WhatsApp

Join KMB News WhatsApp Channel

Get instant Hindi & English news updates directly on WhatsApp.

माहेमऊ में अकीदत के साथ सम्पन्न हुआ उर्से ज़लाल अशरफ, उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब

माहेमऊ में अकीदत के साथ सम्पन्न हुआ उर्से ज़लाल अशरफ, उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब

केएमबी खुर्शीद अहमद

माहेमऊ(अमेठी)। ग्राम सभा माहेमऊ, विकास खंड जगदीशपुर, जनपद अमेठी में वली-ए-कामिल, सूफ़ी बुज़ुर्ग हुज़ूर सैय्यद शाह ज़लाल अशरफ अशरफीयुल जिलानी (रह.) का मुक़द्दस सालाना उर्स सोमवार 12 जनवरी 2026 को पूरे अदब, अकीदत और रूहानियत के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। जायस शरीफ़ के बाद माहेमऊ की सरज़मीं पर आयोजित इस उर्स ने सूफ़ियाना तहज़ीब, भाईचारे और इंसानियत की ख़ूबसूरत मिसाल पेश की। सुबह 10 बजे से उर्स का आग़ाज़ चादरपोशी और गागर की रस्म से हुआ, जिसमें दूर-दराज़ से आए अकीदतमंदों ने बढ़-चढ़कर शिरकत की। कव्वाली की रूहानी सदाओं ने पूरे माहौल को इश्क़-ए-हक़ से सराबोर कर दिया। दोपहर 1 बजे से शुरू हुआ लंगर-ए-आम शाम तक लगातार चलता रहा, जिसमें बिना किसी भेदभाव के सैकड़ों लोगों ने एक साथ बैठकर तबर्रुक हासिल किया। लंगर ने बराबरी, मोहब्बत और इंसानियत का पैग़ाम दिया। रात में आयोजित रूहानी महफ़िल में देश के मशहूर उलमा ने अपने ख़िताब से दिलों को रोशन किया। इस मौके पर हज़रत अल्लामा मौलाना सैय्यद आलमगीर अशरफ किछौछवी और मौलाना डॉ. ख़ालिद मोहम्मद अयूब साहब ने सूफ़ी संतों की ज़िंदगी, उनके पैग़ाम और समाज में अमन की अहमियत पर विस्तार से रोशनी डाली। वहीं शायरे इस्लाम जनाब कमाल अख्तर बसतवी ने अपने असरदार कलाम से महफ़िल को रूहानी रंग में रंग दिया।
उर्स के दौरान मदरसा क़ादरिया अशरफिया के हाफ़िज़-ए-क़ुरआन बच्चों की दस्तारबंदी भी की गई, जिसे देखकर अकीदतमंदों की आँखें खुशी और दुआओं से भर आईं। अकीदतमंदों ने कहा कि हुज़ूर ज़लाल अशरफ (रह.) की ज़िंदगी सादगी, ख़िदमत और इंसानियत का जीता-जागता नमूना थी। उनकी दरगाह आज भी हर उस शख़्स के लिए पनाहगाह है, जो टूटे दिल और उम्मीद के साथ दर पर आता है।
उर्स इंतज़ामिया कमेटी ने सफल आयोजन के लिए तमाम मेहमान उलमा, शायरों, ख़ादिमीन, स्वयंसेवकों और अकीदतमंदों का आभार व्यक्त किया। पूरे माहेमऊ और आसपास के इलाक़ों में उर्स के बाद भी रूहानी सुकून और सुकून-ए-दिल का माहौल बना रहा।
इस मुक़द्दस उर्स की विस्तृत जानकारी पत्रकार अमीर अशरफ ने दी और कहा—“यह उर्स सिर्फ़ एक रस्म नहीं, बल्कि अमन, इंसानियत और मोहब्बत की ज़िंदा तहरीक है, जो हर दिल को जोड़ने का काम करती है।” उर्से ज़लाल अशरफ एक बार फिर यह साबित कर गया कि सूफ़ियाना विरासत आज भी समाज को जोड़ने और नफ़रत के अंधेरे में मोहब्बत की रोशनी जलाने का काम कर रही है।
और नया पुराने

Ads

Ads

نموذج الاتصال