सलाबतगढ़ में गूंजा पैग़ाम-ए- रिसालत का पैग़ाम, जश्ने दस्तार बंदी में हज़ारों की शिरकत से रोशन हुआ इजलास
अमेठी। जगदीशपुर के सलाबतगढ़ में शनिवार को पैग़ाम-ए-मुस्तफ़ा कॉन्फ्रेंस व दस्तारबंदी समारोह का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज़ से आए उलमा, शायरों और धर्म प्रेमी लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कार्यक्रम की सरपरस्ती पीरे तरीक़त हज़रत अल्लामा मौलाना सैय्यद कसीम अशरफ (हसन मियां )जायसी ने की। सुबह 9 बजे से शुरू हुए इस ऐतिहासिक जलसे में आयोजक मज़ाहिर अशरफ व मौलाना मुख्तार साहब (प्रिंसपल मदरसा हिजा) की देखरेख में पूरे कार्यक्रम को अनुशासित और गरिमामय रूप दिया गया। कार्यक्रम के मुख्य ख़तीब मौलाना मुशाहिद साहब इलाहाबादी ने अपने प्रभावशाली ख़िताब में इस्लाह, अख़लाक़ और समाज सुधार पर ज़ोर देते हुए कहा कि “आज की युवा पीढ़ी को दीन और इल्म से जोड़ना वक़्त की सबसे बड़ी ज़रूरत है।” मशहूर शायर साजिद समीनी (जगदीशपुर, अमेठी) ने अपनी दिलकश नज़्मों और कलाम से माहौल को रूहानी रंग में रंग दिया। इस अवसर पर 12 होनहार बच्चों की दस्तारबंदी की गई, जिनमें 6 हाफ़िज़-ए-क़ुरआन और 6 क़ारी शामिल थे। बच्चों को दस्तार पहनाकर सम्मानित किया गया, जिससे अभिभावकों और क्षेत्रवासियों में गर्व और खुशी की लहर दौड़ गई। कार्यक्रम में स्टाफ़ क़ारी मुफ़ीस साहब, मास्टर अरमान साहब व मास्टर नदीम साहब की सक्रिय भूमिका सराहनीय रही।
जलसे का समापन मौलाना जावेद साहब के प्रभावशाली संबोधन के साथ हुआ, जबकि अंत में सैय्यद कसीम अशरफ (हसन मियां) जायस की विशेष दुआ मुल्क और मिल्लत में शान्ति सद्भाव के लिए की गई। हज़ारों की तादाद में मौजूद लोगों ने इस आयोजन को क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक और प्रेरणादायक बताते हुए आयोजकों की खुले दिल से प्रशंसा की।
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