त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से जुड़ी बड़ी खबर: मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तिथि 22 अप्रैल से बढ़ाकर 10 जून की गई
चुनावी कैलेंडर पर पड़ा सीधा असर
मतदाता सूची के प्रकाशन में बदलाव का असर केवल तारीखों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरी चुनावी समय-सारिणी प्रभावित होती दिखाई दे रही है। अंतिम वोटर लिस्ट जारी होने के बाद ही नामांकन, मतदान और मतगणना जैसी प्रक्रियाओं का रास्ता साफ होगा। ऐसे में उत्तर प्रदेश के गांवों में स्थानीय सत्ता के इस बड़े चुनाव के लिए इंतजार और लंबा हो सकता है। इस बीच एक बड़ा सवाल पंचायतों के प्रशासनिक संचालन को लेकर भी खड़ा हो गया है। चूंकि उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल तय समय पर समाप्त हो जाएगा, इसलिए चुनाव होने तक पंचायतों में व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार को वैकल्पिक इंतजाम करने पड़ सकते हैं। माना जा रहा है कि इस अवधि में प्रशासकों की नियुक्ति जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
मतदाता सूची को लेकर बदला गया कार्यक्रम
निर्वाचन प्रक्रिया में संशोधन के तहत उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को अंतिम रूप देने से पहले कई तकनीकी और प्रशासनिक चरण तय किए गए हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह की ओर से जारी संशोधित निर्देशों के अनुसार, मतदाताओं के डिडुप्लीकेशन यानी दोहराव हटाने और कम्प्यूटरीकरण का काम 21 अप्रैल से 28 मई 2026 तक पूरा किया जाएगा। इसके बाद 29 मई से 9 जून 2026 के बीच मतदान केंद्रों का क्रमांकन, मतदेय स्थलों की वार्डवार मैपिंग, मतदाता क्रमांकन, एसवीएन आवंटन, मतदाता सूची डाउनलोड करना और फोटो प्रतियां तैयार कराने जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इस पूरी कवायद के बाद 10 जून 2026 को अंतिम निर्वाचक नामावली आम जनता के लिए प्रकाशित की जाएगी,
जिला स्तर पर अफसरों को सौंपी गई जिम्मेदारी
इस संशोधित कार्यक्रम को लागू कराने की जिम्मेदारी जिला स्तर के अधिकारियों को सौंपी गई है। आदेश के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में जिला मजिस्ट्रेट, जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी आगे की प्रक्रिया को तय समय के भीतर पूरा कराएंगे। इससे साफ है कि चुनावी तैयारी को लेकर प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय कर दी गई है,
छुट्टियों में भी जारी रहेगा काम
निर्वाचक नामावली पुनरीक्षण का काम तय समय पर पूरा हो, इसके लिए उत्तर प्रदेश में संबंधित कार्यालयों को सार्वजनिक अवकाश के दिनों में भी खोले जाने का निर्देश दिया गया है। इसका मतलब साफ है कि प्रशासन किसी भी स्तर पर देरी की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता और वोटर लिस्ट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया लगातार जारी रखी जाएगी।
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