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बाल विकास परियोजना अधिकारी दोस्तपुर राहुल त्रिपाठी के नेतृत्व में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पोषण पाठशाला का हुआ आयोजन।

बाल विकास परियोजना अधिकारी दोस्तपुर राहुल त्रिपाठी के नेतृत्व में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पोषण पाठशाला का हुआ आयोजन।

केएमबी मंडल ब्यूरो कर्मराज द्विवेदी

           सुल्तानपुर 26 मई/आई0सी0डी0एस0 द्वारा जन-मानस एवं लाभार्थियों को विभाग की सेवाओं पोषण प्रबंधन, कुपोषण से बचाव के उपाय एवं पोषण शिक्षा आदि के सम्बन्ध में दिनांक 26 मई 2022 को अपरान्ह 12ः00 से 02ः00बजे तक योजना भवन एन0आई0सी0 से वीडियों काफ्रेन्स के माध्यम से पोषण पाठशाला  आयोजित की गई। जिसकी मुख्य थीम शीघ्र स्तनपान  केवल स्तनपान रहा जिसमें निदेशक बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशक राज्य पोषण मिशन सहित पोषण विशेषज्ञ द्वारा स्तनपान के सम्बन्ध आवश्यक जानकारी सभी को प्रदान की गई। जिसे विकास भवन सुलतानपुर स्थित एन0आई0सी0 में तथा  जनपद के 2318 आगनबाडी केन्द्रां पर आगनबाडी कार्यकत्रियों के द्वारा विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गये स्मार्ट फोन के माध्यम से वेबकास्ट के से वहॉ उपस्थित गर्भवती/ धात्री महिलाओं तथा लाभार्थियों/उनके अभिभावकों/ आशा, आशा संगिनी  को पाठशाला से जोड़ा गया जिनकी संख्या लगभग 34770 रही।  इस पाठशाला में  विभागीय अधिकारियों के अतिरिक्त विषय विशेषज्ञों द्वारा थीम की आवश्यकता, महत्व एवं उपयोगिता आदि के सम्बन्ध में विस्तार से समझाया गया इस क्रम में सर्वप्रथम डा0 रेनू श्रीवास्तव, निदेशक-नवजात और बाल स्वास्थ्य आईएचएटी-यूपीटीएसयू लखनऊ द्वारा स्तनपान के महत्व को समझाते हुये बताया गया कि स्तनपान मॉ से जुड़ाव एवं विकास को बढ़ावा देता है। तथा शिशु को संक्रमण से बचाता है। स्तनपान के तीन मंत्र के सम्बन्ध में बताया कि, 1- शीघ्र स्तनपान- जन्म के 01 घण्टे के भीतर स्तनपान से कोलेस्ट्रम मिलता है। 2-प्रथम  06 माह तक शिशु को केवल स्तन पान 03- लगातार स्तनपान- 24 महीने तक लगातार स्तनपान कराने से शिशु में प्रोटीन, विटामिन व रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। डा0 मनीष कुमार सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, सामुदायिक चिकित्सा विभाग डा0 आरएमएल आईएमएस (लोहिया हास्पिटल) लखनऊ द्वारा स्तनपान के महत्व को समझाते हुये बताया गया कि मॉ दूध अमृत समान होता है। जन्म के समय बच्चे के साथ मॉ का जुड़ाव सक्रिय रहता है अतः जन्म के 01 घण्टे के अन्दर अथवा शीघ्र अतिशीघ्र स्तनपान कराने से 02 प्रकार के हारमोन जो उस समय दूध में मौजूद रहते हैं शिशु को पर्याप्त मात्रा में मिल जाते हैं। उस दूध में प्रोटीन व एण्टीबाडी भी अधिक होती है 13 प्रतिशत मृत्युदर को 01 घण्टे के भीतर स्तनपान, 06 माह तक शिशु को केवल स्तन पान 24 महीने तक लगातार स्तनपान कराने से कम किया जा सकता है। यह दूध शिशु को जीवनभर डाइबिटीज,हृदयरोग के खतरों से भी बचाता है। शिशु के दिमागी विकास के लिये दूध में पाये जाने वाले प्रोटीन कारगर है। मॉ के दूध में लैक्टोज की मात्रा अधिक पायी जाती है। यह भी बताया कि यदि मॉ रात के समय में शिशु को दूध पिलाती है तो उसके परिणाम और बेहतर आते हैं।डा0 मो0सलमान खान, वरिष्ठ सलाहकार (बाल रोग) वीरांगना अवंती बाई महिला अस्पताल (डफरिन)  लखनऊ द्वारा स्तनपान के महत्व को सरल भाषा में समझाते हुये बताया गया कि यदि मॉ 4 प्रकार के ‘स‘ को याद कर लें तो स्तनपान सही तरीके से कराया जा सकता है और उसके परिणाम भी बेहतर आयेंगें। उक्त ‘स‘ को परिभाषित करते हुये बताया कि 1- स्तनपान के समय बच्चे को सहारा देना चाहिये 2- सीधा- स्तनपान के समय बच्चे का कान, कंधा,कूल्हा एक सीध में होना चाहिए 3- सामने- स्तनपान के समय बच्चा व मॉ एक दूसरे के सामने होने चाहिये 4-संपर्क- स्तनपान के समय मॉ का बच्चें से सम्पर्क में होना चाहिये। इसके अतिरिक्त शिशु को दूध पिलाने के बाद कंधे से लगाकर थपथपायें अवश्य जिससे उसे डकार आयेगी व दूध आसानी से पच जायेगा। इसके लिये बताया कि 1,6,24 भी याद रखने को कहा जिसका तात्पर्य है कि जन्म के 01 घण्टे पश्चात मॉ का गाढ़ दूध शिशु को पिलाया जाये, 06 माह तक केवल स्तनपान कराया जाये तथा 24 माह तक अन्य खाद्य पदार्थो के साथ मॉ का दूध भी पिलाते रहा जाये। पाठशाला में लाभार्थियों द्वारा पूॅछे गये प्रश्नों का उत्तर विशेषज्ञों द्वारा दिया गया।
       वी0सी0 कक्ष में श्री रवीश्वर कुमार राव, जिला कार्यक्रम अधिकारी, सहित श्री अजीत कुमार, बाल विकास परियोजना अधिकारी शहर, श्रीमती फुलवासी त्रिसूलिया, सुश्री श्यामलता, श्रीमती विज्ञानी सिंह, श्रीमती अनीला मलिक, श्रीमती मीना सिंह, श्रीमती दीपा बोरा मुख्य सेविकाएं, 04 आगनबाडी कार्यकत्री व 02-02 गर्भवती व धात्री महिलाओं द्वारा प्रतिभाग किया गया तथा वेबकास्ट के माध्यम से जनपद के 2318 आगनबाडी केन्द्रां पर आगनबाडी कार्यकत्रियों के साथ आशा, आशा संगिनी, गर्भवती महिलाएं व अन्य लगभग 34770 लाभार्थियों द्वारा सुना गया।

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