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24 अक्टूबर 1945 को स्थापित संयुक्त राष्ट्र संघ नई दुनिया का प्रतीक व मानवता की आशा है- प्रोफेसर गहरवार

24 अक्टूबर 1945 को स्थापित संयुक्त राष्ट्र संघ नई दुनिया का प्रतीक व मानवता की आशा है- प्रोफेसर गहरवार

केएमबी विनोद मरकाम

सिवनी। शासकीय महाविद्यालय कुरई, सिवनी में स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ, राष्ट्रीय सेवा योजना व  राजनीति विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वाधान में संयुक्त राष्ट्र संघ का स्थापना दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया। चूंकि दीपावली अवकाश लगने वाले थे, इसीलिए यह कार्यक्रम पूर्व में ही आयोजित किया गया।  इस अवसर पर प्राचार्य बी.एस. बघेल की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की शुरूआत प्रो.पंकज गहरवार और  राजनीति विज्ञान विभाग ने उपस्थित स्टॉफ और छात्र-छात्राओं को संयुक्त राष्ट्र संघ स्थापना दिवस की बधाई देते हुए की। उन्होंने कहा कि  संयुक्त राष्ट्र संघ नामक संस्था 24 अक्टूबर 1945 को स्थापित हुई।संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यों में विश्व शान्ति एवम सुरक्षा बनाये रखना,मानवाधिकारों की रक्षा करना, मानवीय सहायता पहुंचाना, सतत विकास को बढ़ावा देना हैं। महाविद्यालय से संयुक्त राष्ट्र संघ पर विचार रखते  हुए छात्रा रेहाना खान  ने बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुए भीषण नरसंहार ने विश्व के राष्ट्रों को अंतराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की स्थापना के लिए इस संगठन के निर्माण की आवश्यकता का अनुभव कराया। इसके परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को हुई। वर्तमान में इसके 193 देश सदस्य हैं। इसके 6 अंग हैं । मुख्यालय न्यूयार्क (अमेरिका) में हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ का प्रमुख उद्देश्य युद्धों को रोककर विश्व में शांति और सुरक्षा की स्थापना करना है। इसी क्रम में बारी-बारी से स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ से जुडे़ कॅरियर मित्र जिनमें शिफा अंजुम, निकिता नागवंशी, मनीषा भलावी, किम्मी पराते, मेघा बरमैया, शैलेष भलावी ने अपने विचार रखते हुए बताया कि भारत की संयुक्त राष्ट्र संघ में गहरी आस्था है। भारत संयुक्त राष्ट्र संघ का संस्थापक सदस्य है। अवसर पर कार्यक्रम प्रभारी  प्रो,. पंकज गहरवार ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने कई बार ऐसा मंच दिया है जिससे इसे विरोध, आक्रोश को अभिव्यक्त करने का ‘सेफ्टी वाल्व’ का नाम दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र संघ की सफलता इसी बात से आंकी जा सकती है कि संयुक्त  राष्ट्र संघ के रहते तृतीय विश्व युद्ध नहीं हुआ। जब-जब विश्व युद्ध की संभावना बनी संयुक्त राष्ट्र ने शांति का मरहम लगाया। अब समय आ गया है जब भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् का स्थायी सदस्य बनाया जाए। भारत ने विश्व मंच पर अपनी एक अलग पहचान बनायी है। संयुक्त राष्ट्र अपने विभिन्न अंगों के माध्यम से विश्व की एकता व मानवता की सेवा कार्य कर रहा है। इस शुभ दिवस के अवसर पर श्रीमती तीजेश्वरी पारधी के मार्गदर्शन में महाविद्यालय के विद्यार्थियों जिनमे कु आस्था राय व महिमा झारिया  ने संयुक्त राष्ट्र संघ के ध्वज से जुड़े पोस्टर बनाये। पोस्टर के द्वारा उन्होंने बताया कि इस ध्वज की पृष्ठभूमि हल्की नीली हैं तथा इसका मध्य भाग सफेद हैं। ध्वज पर विश्व का मानचित्र अंकित हैं , जो उत्तरी ध्रुव की और से उठा हुआ दिखाई देता हैं। मानचित्र पर फैली हुई जैतून की शाखाओं का एक युग्म शान्ति के प्रतीक के रूप में अंकित हैं।प्रो0 गहरवार ने शायराना अंदाज में कार्यक्रम का समापन किया
‘‘बीज जैसे किसान बोता है, जैसे बादल धरा भिगोता है।
 वैसे ही दुनिया को हँसीं बनाने का सभी पर दारोमदार है।।’’

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