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बोधगया महाविहार, महू स्मारक और दीक्षाभूमि के प्रबंधन को लेकर बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया का आक्रोश

बोधगया महाविहार, महू स्मारक और दीक्षाभूमि के प्रबंधन को लेकर बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया का आक्रोश
केएमबी सुनील कमार
सुल्तानपुर। दि बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन के क्रम में बुधवार को संगठन ने अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट प्रीति जैन को सौंपा। ज्ञापन जिलाध्यक्ष धर्मराज बौद्ध के नेतृत्व में दिया गया।

संगठन ने आरोप लगाया कि बोधगया महाबोधि महाविहार का प्रबंधन संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन करते हुए बौद्ध समाज से छीन लिया गया है। बिहार सरकार द्वारा बनाए गए बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 को संविधान विरोधी बताते हुए सोसाइटी ने मांग की कि महाबोधि महाविहार का पूरा प्रबंधन बौद्ध समाज को सौंपा जाए और इसमें डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के पौत्र डॉ. औमराव यशवंतराव अंबेडकर की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

मध्य प्रदेश के महू में बने डॉ. अंबेडकर स्मारक के प्रबंधन पर भी सवाल उठाते हुए संगठन ने कहा कि यहां बाबासाहेब की विचारधारा के विपरीत काम किया जा रहा है। स्मारक पर जयभीम के नारे तक को बदला जा रहा है, जिससे लाखों अनुयायियों में आक्रोश है। सोसाइटी ने मांग की कि स्मारक का प्रबंधन दि बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया को सौंपा जाए।

इसी तरह नागपुर की दीक्षाभूमि पर अवैध कब्जे और विद्रूपिकरण का आरोप लगाते हुए संगठन ने कहा कि इसे भी सोसाइटी को सौंपा जाए, ताकि डॉ. अंबेडकर के विचारों के अनुरूप इसका संचालन हो सके।

ज्ञापन सौंपते समय दयाराम बौद्ध, खुशियाल बौद्ध, पंचशील बौद्ध, रत्नाकरराव बौद्ध, एडवोकेट जयप्रकाश बौद्ध, एड. प्रदीप बौद्ध, एड. सिद्धार्थ बौद्ध, एड. प्रीतम बौद्ध और विशाल बौद्ध सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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