पूर्वांचल राज्य गठन की मांग तेज, अमेठी से उठा सशक्त स्वर
पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ संजय सिंह बोले- विकास के लिए अलग राज्य जरूरी
अमेठी। पूर्वांचल राज्य के गठन की मांग को लेकर अमेठी से एक बार फिर सशक्त आवाज उठी है। बुधवार को ददन सदन में आयोजित खिचड़ी भोज एवं स्नेह मिलन कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ संजय सिंह और पूर्व प्राविधिक शिक्षा मंत्री डॉ अमीता सिंह ने उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से को अलग राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग उपस्थित रहे।डॉ संजय सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है, जहां एक ही प्रशासनिक व्यवस्था के तहत सुशासन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि बड़े राज्यों में लोकतंत्र और प्रशासन दोनों कमजोर पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के आठ मंडलों के 28 जिलों को मिलाकर प्रस्तावित पूर्वांचल राज्य का गठन किया जाए, जिससे क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिल सके। उनके अनुसार, प्रस्तावित पूर्वांचल राज्य की आबादी लगभग 7.98 करोड़ होगी और यह देश का 14वां सबसे बड़ा राज्य बनेगा।उन्होंने कहा कि पूर्वांचल लंबे समय से प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार रहा है, जिसके कारण यहां विकास की गति धीमी है। डॉ संजय सिंह ने ‘पूर्वांचल राज्य संयुक्त संकल्प मंच’ के माध्यम से आंदोलन को आगे बढ़ाने की घोषणा करते हुए, पूर्वांचल राज्य की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे सभी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से एकजुट होने की अपील की।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ अमीता सिंह ने कहा कि भाषाई और सांस्कृतिक दृष्टि से पूर्वांचल की एक अलग पहचान है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों, कुशल श्रम और व्यापक बाजार की उपलब्धता के बावजूद यह क्षेत्र सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है। कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है।उन्होंने कहा कि यदि पूर्वांचल को अलग राज्य का दर्जा दिया जाए तो बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था के जरिए क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। डॉ अमीता सिंह ने पूर्वांचल के सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से एकजुट होकर आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से रखने का आह्वान किया।
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