बांदा क्षत्रिय महासभा ने नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन, सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपते हुए पदाधिकारी
केएमबी ब्यूरो रानू शुक्ला
बांदा। क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष नरेंद्र सिंह परिहार के नेतृत्व में राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को नामित नगर मजिस्ट्रेट को दिए गए ज्ञापन में कहा है कि यह अधिसूचना उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेद भाव को रोकने के उद्देश्य से लाई गई बताई जा रही है, इसमें एससी, एसटी, ओबीसी एवं दिव्यांग छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया है। साथ ही शिक्षा संस्थानों में 90 दिन के भीतर इक्विटी कमेटी के गठन का भी प्रावधान दिया गया है। शिकायतों की जांच का अधिकार भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह अधिसूचना संविधान में प्रदत्त समानता के मूल अधिकार अनुच्छेद 14, 15 एवं 21 की भावना के अनुरूप नहीं है। यह एससी, एसटी एवं ओबीसी वर्ग के छात्रों के अधिकारों पर केंद्रित है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकाराें एवं संवैधानिक संरक्षण को नजर अंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि यूजीसी अधिसूचना को वापस लिया जाए और सभी वर्गों के छात्रों के अधिकारों को दृष्टिगत रखते हुए संविधान संवत नीति का निर्माण किया जाए। चेतावनी दी है कि यदि अधिसूचना को वापस नहीं लिया गया तो क्षत्रिय महासभा लोक तांत्रित संवैधानिक एवं विधिक तरीकों से इसका विरोध करती रहेंगी। ज्ञापन देने में यशपाल सिंह, भूपेंद्र सिंह, उदय प्रताप सिंह, श्याम सिंह, रामकरन सिंह, राजकुमार सिंह, ओमप्रकाश, यशपाल सिंह, दीपक सिंह समेत अनेक क्षत्रिय महासभा के लोग मौजूद रहे।
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