जैन आचार्य वसुनंदी की पदयात्रा पहुंची बैतालपुर: धर्म, सदाचार और अहिंसा का संदेश दिया
देवरिया। दिगंबर जैन आचार्य वसुनंदी जी मुनिराज (एलाचार्य) की धर्म, सदाचार और अहिंसा का संदेश देती पावन पदयात्रा बुधवार को गौरीबाजार होते हुए बैतालपुर पहुंची। जहां मुनिराज की यात्रा विश्राम केनयूनियन सभागार में हुआ। पदयात्रा के दौरान मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया और दर्शन-आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास और भक्ति का माहौल देखने को मिला।
बैतालपुर में पहुंचे आचार्य वसुनंदी जी मुनिराज ने बात-चीत में कहा कि उनकी पदयात्रा का उद्देश्य समाज में धर्म और नैतिक मूल्यों को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि अहिंसा केवल जैन धर्म का सिद्धांत नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग है। सदाचार और संयम को अपनाकर ही मनुष्य आत्मकल्याण की ओर अग्रसर हो सकता है।आचार्य श्री ने नैतिक आचरण को मुक्ति का द्वार बताते हुए कहा कि ज्ञानी वही श्रेष्ठ है, जो अपने ज्ञान को आचरण में उतारता है। उन्होंने कहा कि सभी मनुष्यों में आचारवान श्रमण श्रेष्ठ होता है, क्योंकि उसका जीवन त्याग, तपस्या और करुणा पर आधारित होता है। ऐसे जीवन से ही समाज को सही दिशा मिलती है। इस अवसर पर आचार्य वसुनंदी जी ने खुखुन्दु को भगवान पुष्पदंत की जन्मभूमि बताते हुए नमन किया और उपस्थित श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने कहा कि देवरिया जिले का खुखुन्दु जैन मंदिर देश में “मिनी कुशीनगर” के रूप में जाना जाता है। यहां की पवित्रता, ऐतिहासिकता और धार्मिक महत्व के कारण दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। आचार्य श्री ने यह भी कहा कि इस तीर्थ स्थल की गरिमा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। मंदिर परिसर के आसपास बुनियादी ढांचे के विकास के साथ धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है। यदि समुचित योजना के तहत विकास किया जाए, तो खुखुन्दु न केवल जैन समाज बल्कि समूचे क्षेत्र के लिए आस्था और पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है। आचार्य वसुनंदी जी ने समाज से आह्वान किया कि वे अहिंसा, सत्य और सदाचार को अपने जीवन में अपनाएं और मानवता के कल्याण में योगदान दें।
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