आइजीआरएस निस्तारण में उत्तर प्रदेश में दसवां स्थान, लेकिन जमीनी हकीकत पर उठ रहे सवाल
अमेठी। एकीकृत जन शिकायत निवारण प्रणाली (आइजीआरएस) के निस्तारण में अयोध्या मंडल में पहला एवं उत्तर प्रदेश स्तर पर दसवां स्थान हासिल किया है।सरकारी आंकड़ों में इसे प्रशासनिक सफलता के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। कई शिकायतकर्ता आज भी फर्जी निस्तारण से परेशान हैं और समाधान के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति का आरोप लगा रहे हैं।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वर्षों से लंबित समस्याओं को लेकर आइजीआरएस पर दर्ज शिकायतों में मौके पर जांच किए बिना ही निस्तारित दिखा दिया जाता है। कई मामलों में न तो संबंधित अधिकारी शिकायतकर्ता से संपर्क करते हैं और न ही स्थल निरीक्षण होता है, इसके बावजूद पोर्टल पर “समस्या का समाधान” दर्ज कर दिया जाता है।कुछ शिकायतकर्ताओं ने यह भी बताया कि शिकायत दोबारा दर्ज करने पर वही पुरानी रिपोर्ट कॉपी-पेस्ट कर पुनः निस्तारण दिखा दिया जाता है। इससे आमजन का आइजीआरएस व्यवस्था से भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, उच्चाधिकारियों द्वारा रैंडम आधार पर शिकायतों की समीक्षा की जाती है और असंतोषजनक निस्तारण पाए जाने पर संबंधित विभाग से स्पष्टीकरण भी मांगा जाता है। इसके बावजूद, फील्ड स्तर पर वास्तविक कार्रवाई और पोर्टल रिपोर्टिंग के बीच अंतर साफ दिखाई दे रहा है। जानकारों का मानना है कि जब तक निस्तारण की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच और फर्जी निस्तारण करने वालों पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक रैंकिंग भले सुधरे, लेकिन जनता का भरोसा वापस नहीं आ पाएगा। आइजीआरएस जैसी व्यवस्था का उद्देश्य सिर्फ आंकड़ों में सुधार नहीं, बल्कि आम नागरिक को समयबद्ध और वास्तविक न्याय दिलाना है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन आरोपों पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है।
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