सेलारापुर शरीफ में तीन दिवसीय उर्स का आगज, देश के कोने-कोने से आ रहे हैं जायरीन
देवरिया। सेल्हरापुर में सैयद शाह की दरगाह पर 44वां सालाना उर्स धूमधाम से मनाया जाएगा। तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। रविवार शाम से ही मुंबई, मध्य प्रदेश, बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में जायरीन आने लगे हैं। उर्स की शुरुआत सोमवार शाम को सैयद यासीन शाह की दरगाह पर झंडा बदलने की रस्म के साथ होगी। उर्स मंगलवार और बुधवार तक चलेगा। इस दौरान दरगाह कैंपस में मेला लगता है, जिसमें सभी धर्मों के लोग शामिल होते हैं। हालांकि, उर्स के लिए दूर-दूर से जायरीन रविवार से ही आने लगे हैं।हर गुरुवार को बड़ी संख्या में जायरीन बाबा की दरगाह पर मन्नतें मांगने आते हैं। जब उनकी दुआएं कबूल हो जाती हैं, तो वे पारंपरिक रूप से अगरबत्ती और गुलाब चढ़ाते हैं। महिलाओं का दरगाह में जाना मना है। महिलाएं बाहर से ही हाथों में गुलाब की पंखुड़ियां लेकर दरगाह में आती हैं।
इसके बाद फूलों को ले जाकर बाबा की दरगाह पर चढ़ाया जाता है। गद्दी नसीन सैयद शकील अहमद शाह ने बताया कि उर्स में आने वाले लोग बहराइच और देवा शरीफ भी उर्स में पहुंचकर अपना हुनर दिखाएंगे।
दरगाह के मुख्य सज्जादानशीन सैयद शकील अहमद शाह ने बताया कि सैयद बाबा का इतिहास लगभग चार से पांच सौ साल पुराना है। दरगाह की मौजूदा जगह पहले एक बहुत बड़ा जंगल हुआ करता था। सैयद बाबा इसी जंगल में रहते थे। यहीं रहते हुए उन्होंने समाधि ली थी। इस जगह की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जो भी बाबा की दरगाह पर आता है और दिल से कोई मुराद मांगता है, बाबा उसे ज़रूर पूरा करते हैं।
Post a Comment