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जिले के बिजली विभाग का अजीबोगरीब कारनामा, शिकायत किसी की तो नपता कोई और है

जिले के बिजली विभाग का अजीबोगरीब कारनामा, शिकायत किसी की तो नपता कोई और है

केएमबी रुखसार अहमद
सुलतानपुर। जिले के बिजली विभाग का एक अजीबोगरीब कारनामा सामने आया है जिसमें पीड़ित के द्वारा शिकायत किसी और की गई और दंडित कोई और हुआ। विद्युत विभाग में नलकूप कनेक्शन में सुविधा शुल्क मांगने और हैरान एवं परेशान करने पर तेज बहादुर सिंह ग्राम पलहीपुर महादेवा ने अधीक्षण अभियंता से बाकायदे शपथ पत्र के माध्यम से जेई केएनआई सुलतानपुर राम जनम के खिलाफ शिकायत की थी, लेकिन जेई को सुरक्षित कर कार्यकारी सहायक मोइद अहमद नाप दिए गए जिसको लेकर शपथी तेज बहादुर सिंह ने दुबारा शपथ पत्र देकर स्पष्ट किया है कि कार्यकारी सहायक मोईद अहमद द्वारा न तो उन्हें किसी प्रकार से परेशान किया गया और न ही हैरान। अब यह सवाल उठना लाजमी है जब शिकायत जेई के विरुद्ध हुई तो कार्यवाही कार्यकारी सहायक पर क्यों जबकि पता चला है कि कार्यकारी सहायक को पहले ही संबंधित पटल से अधिशासी अभियंता द्वारा हटाया जा चुका है। तेज बहादुर सिंह ने अपने शपथ पत्र में   नलकूप संयोजन के लिए आवेदन करना बताया है। संबंधित कार्यकारी सहायक को 5-9-2022 को संबंधित पटल से हटाकर किसी और को इस पटल का कार्यभार अधिशासी अभियंता के द्वारा सौंप गया। संबंधित प्रकरण में जेई द्वारा 29-9-2022 को एस्टीमेट बनाया गया और पोर्टल पर अपलोड किया गया। त्वरित गति से उसी दिन एसडीओ द्वारा भी एस्टीमेट अप्रूव कर पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया। यही नहीं 29-9-2022 को अधिशासी अभियंता गौरव तिवारी ने भी गजब की तेजी दिखाते हुए एस्टीमेट पोर्टल पर अपलोड किया। अधिशासी अभियंता द्वारा पोर्टल पर अपलोड किए जाने के बाद पटल सहायक का काम शुरू होता है। जब निलंबित लिपिक 5-9-2022 से उस कुर्सी पर है ही नहीं तो उसके ऊपर जिम्मेदारी कैसे फिक्स की जा सकती है। संबंधित जेई को बचाते हुए अधीक्षण अभियंता के द्वारा कार्यकारी सहायक को निलंबित करते हुए विद्युत वितरण खंड लंभुआ से संबद्ध कर दिया गया है। ऐसी परिस्थिति में जेई रामजनम को बचाने के लिए कार्यकारी सहायक जिसके पास 29 सितंबर 2022 को उस पटल का कार्यभार भी नहीं था, को अधीक्षण अभियंता द्वारा निलंबित किया जाना कहां तक उचित है बड़ा सवाल है? प्रकरण के संबंध में अधीक्षण अभियंता से बात की गई तो उन्होंने कहा अभी तक आधिकारिक रूप से उन्हें कोई शपथ पत्र तेज बहादुर की तरफ से दोबारा नहीं प्राप्त हुआ। प्रकरण की जांच अधिशासी अभियंता लंभुआ द्वारा की जा रही है। जांच उपरांत ही प्रकरण के संबंध में कुछ बताया जा सकता है।

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