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उच्च शिक्षा निदेशक ने किया सरोजिनी नगर के राजकीय महाविद्यालय का औचक निरीक्षण, नदारत रहे महाविद्यालय से शिक्षक-कर्मचारी

उच्च शिक्षा निदेशक ने किया सरोजिनी नगर के राजकीय महाविद्यालय का औचक निरीक्षण, नदारत रहे महाविद्यालय से शिक्षक-कर्मचारी

केएमबी ब्यूरो उर्मिला सिंह
लखनऊ। एक ओर जहां सरकार द्वारा बेहतर शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार ही इस मुहिम को कमजोर करने में लगे हैं। इसका ताजा उदाहरण बुधवार को उस समय देखने को मिला, जब शिक्षा निदेशक (उच्च शिक्षा) प्रो. डॉ. बी.एल. शर्मा ने राजकीय महाविद्यालय, लतीफनगर (सरोजनीनगर) का औचक निरीक्षण किया। बुधवार सुबह करीब 10:25 बजे किए गए इस निरीक्षण में महाविद्यालय की कार्यप्रणाली में गंभीर लापरवाही उजागर हुई। निरीक्षण के समय संस्थान में केवल डॉ. ममता मधुर (असिस्टेंट प्रोफेसर, वाणिज्य) और तीन आउटसोर्सिंग कर्मचारी ही उपस्थित पाए गए। हैरानी की बात यह रही कि निर्धारित समय के बावजूद अन्य कोई शिक्षक या शिक्षणेत्तर कर्मचारी मौके पर मौजूद नहीं था। निरीक्षण के दौरान ही लगभग 10:50 बजे कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. सुधा तथा रसायन विज्ञान के प्रवक्ता डॉ. अमित कुमार यादव महाविद्यालय पहुंचे, जिससे समय पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके अलावा दर्शनशास्त्र के डॉ. प्रमोद कुमार सिंह, वाणिज्य के डॉ. पवन कुमार मौर्य, वनस्पति विज्ञान के डॉ. राघवेन्द्र प्रताप नारायण, इतिहास के डॉ. केशरी नन्दन मिश्रा, जन्तु विज्ञान के डॉ. राजेश यादव, मनोविज्ञान की डॉ. इरा फात्मा, अर्थशास्त्र की डॉ. सविता, संस्कृत की डॉ. वंदना, गणित की डॉ. शिल्पी सिंह सहित शिक्षणेत्तर कर्मचारी प्रधान सहायक वंदना सिंह एवं वरिष्ठ सहायक नंदिनी निर्धारित समय तक अनुपस्थित पाए गए।
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि उपस्थिति पंजिका प्राचार्य कक्ष में उपलब्ध नहीं थी।कार्यवाहक प्राचार्य ने बताया कि पंजिका लिपिक के पास है, जबकि संबंधित लिपिक भी अनुपस्थित थीं। इस पर शिक्षा निदेशक ने कड़ी नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया कि उपस्थिति पंजिका अनिवार्य रूप से प्राचार्य कक्ष में रखी जाए और भविष्य में निरीक्षण के समय उसे प्रस्तुत करना सुनिश्चित किया जाए। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि निर्धारित समय पूर्वाह्न 10:00 बजे होने के बावजूद महाविद्यालय में कोई भी छात्र-छात्रा उपस्थित नहीं मिला।शिक्षा निदेशक ने सभी अनुपस्थित प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध एक दिन का वेतन रोकने तथा अनुशासनिक कार्रवाई प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी संबंधितों को निर्देशित किया गया है कि वे अपनी अनुपस्थिति का स्पष्टीकरण प्राचार्य के माध्यम से दो कार्यदिवस के भीतर ई-मेल के जरिए प्रस्तुत करें। इसके अतिरिक्त निदेशक ने महाविद्यालय प्रशासन को निर्देशित किया कि इंटर कॉलेजों में प्रचार-प्रसार कर छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जाएं तथा वाचनालय, पुस्तकालय और स्मार्ट क्लास का नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए। इस स्थिति को देखते हुए स्पष्ट है कि जहां एक ओर शासन शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रयासरत है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर लापरवाही व्यवस्था को प्रभावित कर रही है।

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