शासकीय महाविद्यालय बरघाट में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई जयंती
'नर हो, न निराश करो मन को' की गूंज से प्रेरणामय बना वातावरण
बरघाट, 03 अगस्त। शासकीय महाविद्यालय बरघाट में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती श्रद्धा, सम्मान एवं साहित्यिक गरिमा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रकवि के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बी. एल. इनवाती ने की। कार्यक्रम के दौरान छात्रा यशस्वी कश्यप ने राष्ट्रकवि की सुप्रसिद्ध प्रेरणादायी कविता "नर हो, न निराश करो मन को" का ओजपूर्ण एवं भावपूर्ण पाठ प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, कर्मशीलता एवं सकारात्मक जीवन-दृष्टि का संदेश प्रसारित किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में हिंदी साहित्य के विद्वान एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बी. एल. इनवाती ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनके कालजयी ग्रंथ 'साकेत', 'यशोधरा' तथा अन्य साहित्यिक कृतियों की विशेषताओं का विस्तृत विश्लेषण किया। उन्होंने गुप्त जी की जीवनी, साहित्य-दृष्टि एवं राष्ट्रीय चेतना में उनके अप्रतिम योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने खड़ी बोली हिंदी को काव्य की प्रतिष्ठित भाषा बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उनकी रचनाएँ राष्ट्रप्रेम, भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता, नारी सम्मान एवं मानवीय मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्रकवि के साहित्य का गंभीर अध्ययन कर उनके आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन कार्यक्रम अधिकारी प्रो. पंकज गहरवार ने किया। संचालन के दौरान उन्होंने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की प्रेरणादायी पंक्तियों का उद्धरण प्रस्तुत कर विद्यार्थियों का मन मोह लिया तथा कार्यक्रम को साहित्यिक गरिमा प्रदान की। इस अवसर पर जयश्री भलावी, डॉ. शैल तिवारी, प्रो. संगीता उइके, डॉ. आरती भीमटे एवं भौतिक शास्त्र विभाग में कार्यरत नम्रता उइके ने भी राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के साहित्य, हिंदी भाषा के विकास तथा राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में उनके अमूल्य योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में महाविद्यालय के जितेंद्र अहिरवार, मानेश्वर बिसेन, डॉ. निर्वेद शर्मा, विश्वनाथ ठाकुर, चाइना उके, राजेश्वरी सोनटके, तेजेश्वरी बोपचे, डॉ. विनीता बेदुआ, सुगंधा बर्मन, सीमा बाहेश्वर सहित समस्त प्राध्यापकगण, कर्मचारी एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। कार्यक्रम को सफल बनाने में लोकेश हुमनेकर, प्रियांशु राहंगडाले, दीपक राहंगडाले, रचिता पांडे, सागर मेश्राम एवं नवदीप का विशेष योगदान रहा। अंत में प्रो. छत्रपाल सिंह जाटव ने आभार प्रदर्शन करते हुए सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के आदर्शों का अनुसरण करते हुए राष्ट्रसेवा, मानवीय मूल्यों एवं साहित्यिक चेतना को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।
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