⚡ ब्रेकिंग News

मौसम की मार ने तोड़ी किसानों की कमर, खेत में धान और सिर पर कर्ज

मौसम की मार ने तोड़ी किसानों की कमर, खेत में धान और सिर पर कर्ज

केएमबी खुर्शीद अहमद
अमेठी। चार-पांच महीने तक खेतों में पसीना बहाने के बाद जिस धान की फसल को किसान घर लाने की तैयारी में जुटा था, उस पर बारिश और तेज हवाओं ने संकट खड़ा कर दिया है। खाद की किल्लत, कीट-पतंगों, सांप-बिच्छुओं, जंगली और छुट्टा पशुओं से फसल बचाने की जद्दोजहद के बाद अब मौसम की मार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दो दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश और शुक्रवार दोपहर तेज हवाओं के साथ हुई बरसात से कई खेतों में पानी भर गया और पकने की ओर बढ़ रही धान की फसल गिर गई। खेत में खड़ी और गिरी फसल को देखकर किसानों के सामने अब केवल उपज बचाने की चुनौती नहीं है, बल्कि पूरे साल के आर्थिक हिसाब-किताब का सवाल खड़ा हो गया है।किसानों का कहना है कि धान की गुणवत्ता प्रभावित हुई या खेत में पड़ी फसल में दाने अंकुरित होने लगे तो उपज का उचित मूल्य मिलना मुश्किल हो सकता है। वहीं खराब फसल और पुआल के नुकसान से पशुओं के चारे की समस्या भी पैदा हो सकती है। इसके अलावा घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की दवा, कर्ज की किस्त और अगली रबी फसल की तैयारी का खर्च भी किसानों के सामने है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि धान की उपज खराब हुई तो अगली फसल के लिए बीज, खाद और जुताई-बुवाई का इंतजाम किसान कैसे करेगा। ऐसे में बारिश से हुआ नुकसान केवल एक फसल तक सीमित नहीं, बल्कि किसान की आगामी आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित कर सकता है। प्रभावित किसानों ने मांग की है कि खेतवार सर्वे कर वास्तविक नुकसान का आकलन कराया जाए, फसल बीमा दावों का समय से निस्तारण हो और पात्र किसानों को नियमानुसार अधिकतम संभव मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। किसानों ने कृषि ऋण में राहत तथा बची हुई धान की उपज की उचित सरकारी खरीद सुनिश्चित किए जाने की भी मांग की है।बारिश के बीच किसान की निगाह अब आसमान के साथ-साथ प्रशासन की ओर भी है। किसानों को उम्मीद है कि नुकसान का सही आकलन कर उन्हें समय रहते राहत दी जाएगी, ताकि मौसम की मार के बाद उनके सामने आर्थिक संकट और गहरा न हो।

Post a Comment

أحدث أقدم
BREAKING NEWS : Loading...

ताज़ा खबरें

राजनीति समाचार
राजनीति समाचार लोड हो रहे हैं...