पशुधन संवर्धन बोर्ड अध्यक्ष स्वामी श्री अखिलेश्वरानंद जी गिरी के मुख्य आतिथ्य में मनाया गया

पशुधन संवर्धन बोर्ड अध्यक्ष स्वामी श्री अखिलेश्वरानंद जी गिरी के मुख्य आतिथ्य में मनाया गया 

केएमबी नीरज डेहरिया

सिवनी। संस्कृति विभाग म.प्र.शासन के निर्देशानुसार जन अभियान परिषद सिवनी द्वारा आचार्य शंकर (जगत गुरू शंकराचार्य जी) की जयंती पर एकात्म पर्व के रूप में ज्यारत नाका स्थित वन विभाग के सहभागिता भवन में मनाया गया। इस आयोजन में विशिष्ठ अतिथि के रूप मध्यप्रदेश गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड अध्यक्ष (का.प.) स्वामी अखिलेश्वरानंद जी गिरी तथा अध्यक्ष के रूप में स्वामी बलवंतानंद जी महाराज, शिवनारायण पटेज वरिष्ठ सामाजिक कार्यकता एवं अध्यक्ष स्व. रामनारायण पटेल समाज उत्थान समिति जबलपुर, डॉ.रामकुमार चतुर्वेदी प्रो.लॉ. कॉलेज एवं साहित्यकार आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ मॉ सरस्वती एवं शंकराचार्य जी का पूजन एवं दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन कर गुरूओं की महिमा का वर्णन कर आदि शंकराचार्य जी के उददेश्यों से अवगत कराकर कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। उदबोधन श्रृंखला में विशिष्ठ अतिथि श्री रामकुमार चतुर्वेदी जी ने आदि शंकराचार्य जी के जीवन को कैसे सामान्य जनमानस द्वारा अपनाया जा सकता है।अति सामान्य शब्दों में वर्णित किया साथ ही आदि शंकराचार्य जी एवं मंडल मिश्र के मध्य हुये शास्त्रार्थ का भी वर्णन किया। अन्य विशिष्ठ अतिथि स्वरूप आये शिव नारायण जी पटेल द्वारा अपने उदबोधन में आदि शंकराचार्य जी के जीवन के विभिन्न आयामों को मानव जीवन के लिए क्यों व क्या आवश्यक है इस पर व्याख्यान प्रस्तुत किया आपने यह भी स्पष्ट किया कि मानव जीवन मे सामाजिक समरसता के साथ साथ धार्मिक जीवन शैली को किस प्रकार सरलतम रूप से जीवन निर्वहन किया जा सकता है। आचार्य शंकर द्वारा प्रतिपादित जीवन के सिद्वांत को अपना कर वसुदेव कुटुम्बकम की अवधारणा को मूर्तरूप् प्रदान किया जा सकता है। एकात्म वर्ष के इस आयोजन के मुख्य वक्ता स्वामी श्री अखिलेश्वरानंद जी ने अपना उदबोधन संस्कृत भाषा के श्लोक से विश्व शांति की कामना के साथ की आप श्री ने आचार्य शंकर के जन्म से जुडी महत्वपूर्ण बातों को उपस्थित जन समूह के समक्ष रखी व साथ में भारी संख्या में उपस्थित मातृ शक्ति को नमन कर यह इच्छा प्रकट कर प्रार्थना की कि मातृ शक्ति ही वर्तमान में भविष्य की भावी पीढी को आदि शंकराचार्य के स्वरूप निर्मित कर देश को विश्व पटल पर अभूतपूर्व स्थान दिला सकती है। भगवान आदि शंकराचार्य के किये विभिन्न कार्यो का वर्णन अतिसुंदर  व सरल भाषा शैली में व्यक्त कर यह संकल्प लेने की बात कही हम सभी को भी अपनें अपने जीवन के दैनिक कार्यो के साथ गौ माता व पशूधन का संवर्धन कर गऊ ग्रास हेतु सहयोग करनें की प्रार्थना की साथ ही साथ गौमाता एवं पशुधन को बचानें व संवर्धन हेतु सभी वर्ग व जातियों के विभिन्न पहलुओं का वर्णन कर उनके द्वारा कहे गये उपदेशों वर्तमान परीपेक्ष में क्या प्रासंगिता है का वर्णन भी किया गया।कार्यक्रम के अध्यक्ष स्वामी श्री बलवंतानंद जी महाराज द्वारा अपनें उदबोधन में कार्यक्रम के शतप्रतिशत सफल आयोजन करनें के लिए जन अभियान परिषद सिवनी को बधाई प्रेषित करते हुए किस प्रकार धर्म को अपनाकर विश्व शांति की परिकल्पना को चरितार्थ किये जानें की अवधारणा को साकार स्वरूप प्रदान किया गया।आपने स्वामी श्री अखिलेश्वरानंद जी के उदबोधन में कही गई बातों को आगे बढाते हुये आचार्य शंकर द्वारा बाल्यावस्था में ही सन्यास धारण कर सामान्य जनमानस के जीवन को उचित मार्ग प्रशस्त करनें हेतु इस कठिन मार्ग को चुनने व संपूर्ण जीवन का बलिदान करनें हेतु उन्हे नमन किय। कार्यक्रम का समापन में जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक सौरभ शुक्ला द्वारा उपस्थित विशिष्ठ व आमंत्रित मुख्य वक्ताओं व अतिथियों का सहृदय आभार व्यक्त कर समस्त प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करनें वाले एवं सभी पत्रकार बंधुओं का तहेदिल से आभार व्यक्त किया।

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