सुल्तानपुर | जनपद के लम्भुआ क्षेत्र स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय लम्भुआ में पिछले कई महीनों से रेबीज (Rabies) का टीका उपलब्ध न होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। टीके की कमी के चलते पशुपालक और किसान अपने पशुओं के इलाज के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। इससे क्षेत्र में पशुओं की सुरक्षा और संक्रमण के खतरे को लेकर चिंता गहराती जा रही है।स्थानीय किसानों का आरोप है कि अस्पताल के रिकॉर्ड में आवश्यक दवाएं उपलब्ध दिखाई जाती हैं, लेकिन जब वे इलाज के लिए पहुंचते हैं तो उन्हें निराशा हाथ लगती है। कई किसानों ने बताया कि बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने के बाद भी रेबीज का इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। मजबूरन उन्हें बाहर की मेडिकल दुकानों से महंगे दामों पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
पशुओं की सुरक्षा पर खतरा
ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आजीविका का मुख्य साधन है। ऐसे में रेबीज जैसे जानलेवा रोग से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण बेहद जरूरी है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर टीका न मिले तो पशुओं के साथ-साथ इंसानों में भी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। यह स्थिति ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।राज्य और केंद्र सरकार द्वारा पशुपालन को बढ़ावा देने तथा पशुओं के नियमित टीकाकरण के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। बावजूद इसके जमीनी स्तर पर दवाओं की कमी प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है। किसानों का आरोप है कि संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या की अनदेखी कर रहा है और शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।स्थानीय पशुपालकों ने प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल में शीघ्र रेबीज का टीका उपलब्ध कराया जाए और दवा वितरण व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को भी मजबूर होंगे।अब देखना होगा कि स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जारी सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन कब तक सुनिश्चित किया जाता है और लम्भुआ पशु चिकित्सालय में रेबीज का इंजेक्शन कब तक उपलब्ध हो पाता है।
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