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किसान: देश की रीढ़

 


किसान हमारे देश की अर्थव्यवस्था और समाज की सबसे मजबूत नींव माने जाते हैं। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में किसान सिर्फ अन्नदाता ही नहीं बल्कि जीवनदाता भी हैं, क्योंकि उनके बिना हमारे भोजन की कल्पना भी संभव नहीं है। खेतों में दिन-रात मेहनत करके वे अनाज, फल, सब्ज़ियाँ और कई जरूरी फसलें उगाते हैं, जिनसे पूरा देश चलता है। आज का किसान पहले जैसा नहीं रहा। अब वह आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहा है। ट्रैक्टर, ड्रिप सिंचाई, उन्नत बीज, मौसम की जानकारी देने वाले मोबाइल ऐप और ऑनलाइन बाजार जैसी सुविधाओं ने खेती को नया रूप दिया है। इससे उत्पादन बढ़ा है और किसानों की सोच भी बदली है। अब किसान सिर्फ खेती नहीं करते, बल्कि इसे एक व्यवसाय की तरह देखते हैं।

फिर भी किसानों की जिंदगी आसान नहीं है। उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। मौसम की अनिश्चितता सबसे बड़ी समस्या है। कभी सूखा, कभी बाढ़, कभी ओलावृष्टि—एक ही झटके में पूरी फसल खराब हो सकती है। इसके अलावा बीज, खाद और डीज़ल के बढ़ते दाम भी किसानों पर बोझ डालते हैं। कई बार उन्हें अपनी उपज का सही दाम भी नहीं मिल पाता।

सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि किसानों का साथ दें। समय पर समर्थन मूल्य, सिंचाई की अच्छी व्यवस्था, सस्ती खाद-बीज और फसल बीमा जैसी योजनाएँ किसानों के लिए बहुत मददगार हो सकती हैं। साथ ही, लोगों को भी समझना चाहिए कि अन्न की बर्बादी सीधे किसान की मेहनत का अनादर है।

नई पीढ़ी के किसान अब जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और नई फसलों की ओर भी बढ़ रहे हैं। इससे जमीन की सेहत सुधरती है और आमदनी के नए रास्ते खुलते हैं। कई युवा पढ़-लिखकर वापस गाँव आ रहे हैं और आधुनिक खेती अपना रहे हैं। यह बदलाव भविष्य के लिए अच्छा संकेत है।

अंत में यही कहा जा सकता है कि किसान सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक सेवा है। जब किसान खुशहाल होगा, तभी देश खुशहाल होगा। इसलिए हमें किसानों का सम्मान करना चाहिए और उनके योगदान को समझना चाहिए। हमारी थाली में जो भी खाना आता है, वह किसी किसान की मेहनत का फल है।

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