सड़कों पर समंदर, चौखट पर कीचड़: अमेठी की मोहनगंज तहसील के गेट पर जलभराव से हाहाकार
तिलोई (अमेठी)। "अंधेर नगरी, चौपट राजा" वाली कहावत मोहनगंज तहसील परिसर के मुख्य द्वार पर सटीक बैठती नजर आ रही है। दूर-दराज के गांवों से अपनी फरियाद लेकर आने वाले न्याय प्रेमियों को न्याय मिलना तो दूर, तहसील के मुख्य द्वार पर कदम रखना तक दूभर हो चुका है। गेट से महज 20 मीटर की दूरी तक ऐसा नजारा है कि इंसान पैदल चलना तो दूर, वहां से गुजरने की सोच भी नहीं सकता।
रोजाना अपनी जमीनी, राजस्व व अन्य समस्याओं को लेकर तहसील आने वाले हजारों ग्रामीणों को जलभराव और भारी कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है। विडंबना देखिए, जिस मुख्य द्वार से हर रोज एसडीएम, तहसीलदार और तमाम प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियां सायरन बजाते हुए गुजरती हैं, वहीं कीचड़ का साम्राज्य फैला हुआ है।
तहसील में अपनी फरियाद लेकर पहुंचे ग्रामीणों का कहना है कि
लापरवाही की हद हो गयी है, जब अधिकारी अपने ही दफ्तर के मुख्य द्वार का जलभराव दूर नहीं करवा पा रहे हैं, तो वे गांवों में फैले जलभराव और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान क्या करेंगे? पानी और कीचड़ के कारण आए दिन लोग फिसलकर चोटिल हो रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों को उठानी पड़ रही है।गांव-गांव विकास के दावे करने वाला प्रशासन खुद अपने प्रशासनिक भवन के सामने फैली बदहाली पर आंखें मूंदे बैठा है।
अधिकारियों की इस उदासीनता को देखकर आम जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है। लोगों का साफ तौर पर मानना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी अपनी ही नाक के नीचे फैली इस अव्यवस्था से मुंह मोड़े हुए हैं, तो आम जनता की सुनवाई होने की उम्मीद रखना ही बेकार है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द तहसील गेट पर जमा पानी और कीचड़ से निजात दिलाई जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
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