गुरु जी की भूमिका में नजर आए डीएम: बच्चों से पूछे गणित-अंग्रेजी के सवाल एवं परखी शिक्षा की गुणवत्ता
अमेठी। जिलाधिकारी शशांक चौधरी ने कंपोजिट विद्यालय धनी जलालपुर का औचक निरीक्षण कर शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की उपस्थिति, बच्चों की शैक्षिक क्षमता, मध्याह्न भोजन और साफ-सफाई का जायजा लिया। दोपहर करीब एक बजे विद्यालय पहुंचे डीएम ने खुद शिक्षक की भूमिका निभाते हुए बच्चों से गणित और अंग्रेजी के सवाल पूछे। उन्होंने बच्चों से किताबें पढ़वाईं और बोर्ड पर सवाल हल करवाकर उनकी शैक्षिक क्षमता परखी।निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बच्चों की गृहकार्य कॉपियां भी जांचीं और शिक्षकों को नियमित रूप से गृहकार्य देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया जाए। खासकर पढ़ाई में कमजोर बच्चों को चिह्नित कर उनकी शैक्षिक स्थिति सुधारने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जाएं।
विद्यालय में कुल छह शिक्षकों में से पांच उपस्थित मिले। वहीं, विद्यालय में कुल 134 बच्चे नामांकित पाए गए। डीएम ने शिक्षकों को नियमित शिक्षण कार्य सुनिश्चित करने और बच्चों की पढ़ाई की प्रगति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए।
बंद शौचालय और पानी की समस्या पर जताई चिंता
निरीक्षण के दौरान विद्यालय का बालक शौचालय बंद मिला और नल में पानी भी उपलब्ध नहीं था। इस पर जिलाधिकारी ने खंड शिक्षा अधिकारी को शौचालय की मरम्मत कराने तथा पाइपलाइन दुरुस्त कराकर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यालय में स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने और बच्चों को भोजन से पहले व शौचालय के उपयोग के बाद हाथ धोने के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया।मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश
जिलाधिकारी ने विद्यालय में मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि बच्चों को निर्धारित मानकों के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराया जाए और विद्यालय परिसर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए।
निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र में लगा आरओ काम नहीं करता मिला। इस पर जिलाधिकारी ने पानी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके।
जिलाधिकारी के निरीक्षण का उद्देश्य विद्यालय में शिक्षा की गुणवत्ता, बुनियादी सुविधाओं और स्वच्छता व्यवस्था की स्थिति का जायजा लेना रहा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कमियों को दूर कर बच्चों के लिए बेहतर शैक्षिक वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
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