नगर निकाय के परिसीमन में मानकों की अनदेखी हुई तो होगा बड़ा आंदोलन, जरूरत पड़ी तो जायेंगे हाईकोर्ट
मैरवा (सिवान)। नगर निकाय के परिसीमन में कृषि बहुल गांवों को शामिल किए जाने के विरोध में परिसीमन सुधार संघर्ष समिति ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। समिति ने परिसीमन की प्रक्रिया में निर्धारित मानकों का पालन करने और कृषि प्रधान क्षेत्रों को नगर निकाय की सीमा से बाहर रखने की मांग उठाई है। इसी मांग को लेकर समिति के सदस्यों और स्थानीय ग्रामीणों ने पुरानी सब्जी मंडी से नागरिक मार्च निकाला। मार्च नगर पंचायत कार्यालय पहुंचकर धरने में तब्दील हो गया। धरना के बाद समिति की ओर से नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी को मांग पत्र सौंपा गया। इसके माध्यम से नगर पंचायत प्रशासन और जिला प्रशासन के जरिए सरकार तक ग्रामीणों की मांग पहुंचाई गई। समिति ने चेतावनी दी कि यदि परिसीमन की प्रक्रिया में निर्धारित मानकों की अनदेखी की गई, तो इसके खिलाफ व्यापक आंदोलन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
परिसीमन सुधार संघर्ष समिति का कहना है कि मैरवा क्षेत्र के कई गांवों की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। ग्रामीणों की आजीविका खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर है। ऐसे में कृषि बहुल क्षेत्रों को नगर निकाय की सीमा में शामिल करने की किसी भी पहल का विरोध किया जाएगा। समिति ने कहा कि नगर निकाय के परिसीमन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। जिन क्षेत्रों की पहचान कृषि प्रधान गांवों के रूप में है, उनकी वास्तविक स्थिति का आकलन किए बिना उन्हें शहरी सीमा में शामिल करना उचित नहीं होगा। समिति के सदस्यों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति, कृषि आधारित आजीविका और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए परिसीमन किया जाना चाहिए। उनका आग्रह है कि कृषि बहुल गांवों को ग्रामीण क्षेत्र में ही रहने दिया जाए, ताकि उनकी ग्रामीण पहचान और कृषि आधारित व्यवस्था बनी रहे।
नागरिक मार्च और धरना कार्यक्रम को जीरादेई के पूर्व विधायक अमरजीत कुशवाहा ने संबोधित किया। उन्होंने परिसीमन की प्रक्रिया में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि परिसीमन में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी होती है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाब देना पड़ सकता है। चाहे निर्वाचित जनप्रतिनिधि हों या संबंधित अधिकारी, नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आने पर उन्हें न्यायालय में अपना पक्ष रखना होगा।
Post a Comment