सऊदी की कैद में थम गईं सांसें, दस साल बाद कफन में घर लौटा नंदलाल, आखिरी बार चेहरा देखने को तरसती रही पत्नी
सुल्तानपुर। रोजी-रोटी की तलाश में सऊदी अरब गया नंदलाल पाल वर्षों तक अपनों से दूर रहा।परिवार को उम्मीद थी कि एक दिन वह लौटकर घर आएगा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सऊदी अरब के रियाद में वर्षों से बंद नंदलाल की सांसें थम गईं और उसका पार्थिव शरीर कफन में लिपटकर पैतृक गांव सरैया भरथी पहुंचा। शव देखते ही पत्नी और बच्चों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। धनपतगंज थाना क्षेत्र के सरैया भरथी निवासी स्व. रामबदल पाल के पुत्र नंदलाल पाल वर्ष 2013 और फिर 2016 में रोजी-रोटी कमाने सऊदी अरब गए थे। वर्ष 2016 के बाद वह वहीं स्थानीय प्रशासन की हिरासत में रहे। परिजन वर्षों तक उनकी वापसी की राह देखते रहे। 22 सितंबर को जेल प्रशासन से नंदलाल की मौत की खबर मिली तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पति के अंतिम दर्शन के लिए पत्नी रामकुमारी ने विदेश मंत्रालय से गुहार लगाई। उनकी पीड़ा को देखते हुए समाजसेवी व भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष अब्दुल हक ने पहल की। उन्होंने रियाद स्थित भारतीय दूतावास से लगातार संपर्क कर शव को भारत लाने की प्रक्रिया में सहयोग किया।कागजी और कूटनीतिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 06 अक्तूबर की शाम करीब सात बजे नंदलाल का पार्थिव शरीर लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचा। देर रात शव गांव पहुंचा तो वर्षों से इंतजार कर रहे परिजनों का धैर्य जवाब दे गया। पत्नी, बच्चों और रिश्तेदारों की आंखों से आंसुओं का सैलाब बह निकला। बुधवार सुबह कुड़वार घाट पर सनातन रीति-रिवाजों के साथ नंदलाल का अंतिम संस्कार किया गया।सऊदी अरब में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले बंधुआकलां क्षेत्र के हसनपुर निवासी 26 वर्षीय अब्दुल कादिर का परिवार भी अंतिम दर्शन की आस लगाए बैठा है। रियाद स्थित भारतीय दूतावास की जानकारी के अनुसार प्रशासनिक प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है। अगले तीन-चार दिनों में अब्दुल कादिर का पार्थिव शरीर भी स्वदेश पहुंचने की उम्मीद है। नंदलाल के शव को वतन लाने में मदद के लिए परिजनों ने समाजसेवी अब्दुल हक और भारतीय दूतावास का भावुक होकर आभार जताया।
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