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संघर्ष ही जीवन का सत्य है, परंतु शांति ही मानवता का लक्ष्य- ओम प्रकाश उपाध्याय

संघर्ष ही जीवन का सत्य है, परंतु शांति ही मानवता का लक्ष्य- ओम प्रकाश उपाध्याय

केएमबी ब्यूरो
सुल्तानपुर 16 मार्च। जनता दल (यूनाइटेड) उत्तर प्रदेश के प्रबुद्ध प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश उपाध्याय ने वैश्विक स्तर पर मंडराते युद्ध के बादलों और बढ़ती सैन्य हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की। भारतीय सेना के एक पूर्व जवान की ओजस्वी पंक्तियों— "युद्ध नहीं जिनके जीवन में वह भी बहुत अभागे होंगे, या तो प्रण को तोड़ा होगा या फिर रण से भागे होंगे"— का उल्लेख करते हुए उन्होंने युद्ध की सार्वभौमिकता और शांति की अपरिहार्यता पर भारतीय मनीषा के दृष्टिकोण को रेखांकित किया। जदयू नेता उपाध्याय ने कहा कि भारतीय संस्कृति कभी भी पलायनवाद की पक्षधर नहीं रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उक्त पंक्तियों का अर्थ हिंसा को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का आह्वान है। जीवन स्वयं में एक रणक्षेत्र है, जहाँ अन्याय और अधर्म के विरुद्ध लड़ना व्यक्ति का धर्म है। यदि मनुष्य अपने सिद्धांतों और राष्ट्र की रक्षा के लिए संघर्ष नहीं करता, तो वह कायरता की श्रेणी में आता है।
विश्व के विभिन्न कोनों में जारी युद्धों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि "आज की दुनिया बारूद के ढेर पर बैठी है। जहाँ एक ओर संघर्ष अपरिहार्य जान पड़ता है, वहीं भारतीय मनीषियों ने हमेशा 'वसुधैव कुटुंबकम्' और 'सर्वे भवंतु सुखिनः' का मार्ग दिखाया है। भारत ने सदा यह सिखाया है कि युद्ध अंतिम विकल्प होना चाहिए, न कि प्रथम समाधान।"
ओम प्रकाश उपाध्याय ने जोर देकर कहा कि आज के परमाणु युग में 'विजय' का अर्थ बदल चुका है। आधुनिक युद्ध में कोई विजेता नहीं होता, केवल पराजित मानवता होती है। भारतीय दर्शन के अनुसार, असली वीर वह है जो शांति की स्थापना के लिए शस्त्र उठाता है, न कि साम्राज्य विस्तार के लिए।समाज के बुद्धिजीवियों को आगे आकर संवाद और कूटनीति पर बल देना चाहिए। विश्व को आज सम्राट अशोक के 'धम्म' और महात्मा गांधी के 'अहिंसा' की उतनी ही आवश्यकता है, जितनी भगवान कृष्ण के 'कर्मयोग' की। अंत में, जेडीयू नेता ने वैश्विक शक्तियों से अपील की कि वे विनाशकारी युद्धों को छोड़कर भुखमरी, जलवायु परिवर्तन और बीमारी जैसी साझा चुनौतियों के विरुद्ध 'रण' का बिगुल फूँकें। उन्होंने कहा कि भारत अपनी सैन्य शक्ति को केवल आत्मरक्षा और वैश्विक शांति की बहाली के लिए समर्पित रखता है, जो हमारी गौरवशाली परंपरा का हिस्सा है।

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