बदहाल गौशाला में भूख, बीमारी और लापरवाही के साये में तड़पते गौवंश”
तिलोई,अमेठी। बहादुरपुर विकासखंड के जवाहरगंज स्थित गौ आश्रय स्थल की तस्वीरें और जमीनी हकीकत सरकारी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। यहां संरक्षण के नाम पर गौवंशों की हालत दयनीय बनी हुई है—भूख, प्यास, बीमारी और लापरवाही के बीच उनका जीवन संघर्ष में बदल गया है।
करीब 150 गौवंशों के लिए मात्र 50 किलो पशु आहार और सूखे भूसे की व्यवस्था, हालात की भयावहता को बयां करती है। अपर्याप्त भोजन के कारण कई पशु कमजोर पड़ चुके हैं, जबकि कई दिनों से बीमार गौवंश बिना इलाज के पड़े हैं।गौ आश्रय स्थल में बिजली व्यवस्था पिछले छह महीनों से ठप बताई जा रही है। भीषण गर्मी के बीच पंखे सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं। न रोशनी की समुचित व्यवस्था है, न ही गर्मी से बचाव के कोई उपाय—ऐसे में गौवंशों की पीड़ा और बढ़ती जा रही है स्थल पर कार्यरत केयरटेकर दिनेश कुमार के मुताबिक, पशु चिकित्सकों का आना अनियमित है। परिणामस्वरूप बीमार और घायल गौवंशों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा। एक गाय के शरीर पर खुले घाव होने के बावजूद उपचार न होना स्थिति की गंभीरता को उजागर करता है।गौशाला के बाहर लगाए गए सूचना बोर्ड पर अधिकारियों के संपर्क नंबर दर्ज हैं, लेकिन अधिकांश नंबर गलत पाए गए। इससे शिकायत दर्ज कराना भी मुश्किल हो गया है, जो व्यवस्थाओं में पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है।सरकारी स्तर पर गौ संरक्षण के दावों के बीच यह स्थिति जमीनी हकीकत की अलग ही तस्वीर पेश करती है। सवाल यह है कि क्या इन गौवंशों को वास्तव में वह संरक्षण और सुविधाएं मिल पा रही हैं, जिनका दावा किया जाता है।
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