पंचायत चुनाव अपडेट: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले पर लगाई रोक
केएमबी संवाददाता
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। बता दें कि कार्यकाल खत्म होने पर प्रधानों को प्रशासक बनाया गया था। जिसके बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के आदेश को कोर्ट में चुनौती दी गई थी। गौरतलब है कि हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंचायतीराज विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसके तहत वर्तमान ग्राम प्रधानों को ही पंचायत चुनाव तक प्रशासक बनाया जाएगा। इस निर्णय को पंचायत व्यवस्था और ग्रामीण राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना गया था।
उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों के प्रधानों का कार्यकाल 25 मई को समाप्त हो गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने एक आदेश जारी कर संबंधित ग्राम प्रधानों को ही उनकी पंचायतों का प्रशासक नियुक्त कर दिया। सरकार के इस फैसले के बाद पंचायतों के प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी फिलहाल उन्हीं प्रधानों के पास बनी हुई थी। अब तक परंपरा यह रही है कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद एडीओ पंचायत को प्रशासक नियुक्त किया जाता था, लेकिन इस बार सरकार ने नई व्यवस्था लागू की। राष्ट्रीय पंचायत राज ग्राम प्रधान संघ लंबे समय से मांग कर रहा था कि गांवों के विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए मौजूदा प्रधानों को ही जिम्मेदारी दी जाए। सरकार ने इसी मांग को स्वीकार करते हुए निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक बनाने का फैसला लिया।
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