10 साल बाद भी नहीं बनी बिछुआ की सबसे अहम सड़क, फिर उठी मुख्य मार्ग निर्माण की मांग, जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल
बिछुआ। नगर परिषद बने करीब दस साल बीत चुके हैं, लेकिन बिछुआ नगर की सबसे महत्वपूर्ण सड़क—बस स्टैंड से पावर हाउस तक का मुख्य मार्ग—आज भी बदहाली की पहचान बना हुआ है। हर बरसात में यह सड़क कीचड़, गड्ढों और जलभराव में तब्दील हो जाती है। नगर की पहचान मानी जाने वाली इस सड़क पर रोजाना हजारों लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं।
यही मार्ग कन्या माध्यमिक विद्यालय, उत्कृष्ट विद्यालय, कॉलेज, बस स्टैंड, बाजार और पावर हाउस को जोड़ता है। रोजाना सैकड़ों छात्र-छात्राएं, कर्मचारी, व्यापारी और ग्रामीण इसी रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की अनदेखी के कारण वर्षों से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बारिश शुरू होते ही एक बार फिर सड़क निर्माण की मांग तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली कछुआ चाल से चल रही है, जबकि स्थानीय नेता और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या पर चुप्पी साधे बैठे हैं। लोगों का सवाल है कि आखिर नगर की सबसे अहम सड़क कब बनेगी?
आंदोलन हुए, आश्वासन मिले... लेकिन सड़क आज भी बदहाल
स्थानीय नागरिक बताते हैं कि इस सड़क के लिए कई बार ज्ञापन दिए गए, विरोध प्रदर्शन हुए और विद्यार्थियों ने चक्का जाम तक किया। उस समय तत्कालीन एसडीएम प्रभात मिश्रा ने आश्वासन दिया था कि सड़क निर्माण की स्वीकृति मिलने तक नगर परिषद नियमित मरम्मत कराएगी। मरम्मत हुई भी, लेकिन कुछ ही महीनों में सड़क फिर उखड़ गई। करोड़ों के विकास कार्यों के दावों के बीच आज भी यह सड़क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है।
नगरवासियों का कहना है कि आखिर इस सड़क की जिम्मेदारी किसकी है? यदि यह लोक निर्माण विभाग के अधीन है तो वर्षों से निर्माण क्यों नहीं हुआ? और यदि नगर परिषद जिम्मेदार है तो स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला गया? लोगों का कहना है कि दोनों विभाग जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते रहे और इसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है।
बारिश के दिनों में सड़क पर घुटनों तक कीचड़ और जलभराव हो जाता है। दोपहिया वाहन चालक फिसलने का खतरा उठाते हैं, पैदल चलना मुश्किल हो जाता है और चार पहिया वाहन भी जाम की स्थिति में फंस जाते हैं। हर दिन दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि खराब सड़क के कारण बाहर से आने वाले ग्राहक बाजार आने से बचते हैं। इससे व्यापार प्रभावित हो रहा है और नगर की आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है।
हर चुनाव में सड़क निर्माण बड़े वादों का हिस्सा बनता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही यह मुद्दा भी ठंडे बस्ते में चला जाता है। नगरवासियों का आरोप है कि यदि स्थानीय जनप्रतिनिधि और नेता शासन स्तर पर गंभीरता से पैरवी करते, तो यह सड़क वर्षों पहले बन चुकी होती।
नगरवासियों का कहना है कि आखिर कब तक बच्चे कीचड़ में स्कूल जाएंगे? कब तक लोग जान जोखिम में डालकर इस सड़क से गुजरेंगे? और कब तक शासन-प्रशासन तथा जिम्मेदार विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहेंगे?
नगरवासियों ने शासन, प्रशासन, नगर परिषद, लोक निर्माण विभाग और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि बस स्टैंड से पावर हाउस तक मुख्य सड़क का गुणवत्तापूर्ण और स्थायी निर्माण तत्काल शुरू कराया जाए, ताकि हर साल बरसात में लोगों को होने वाली परेशानी से हमेशा के लिए राहत मिल सके।
चेतन पवार स्थानीय नागरिक का कहना है कि "हर साल बारिश में यही हाल होता है। बच्चे कीचड़ से होकर स्कूल जाते हैं, लेकिन आज तक किसी ने स्थायी समाधान नहीं किया।"
"सड़क की बदहाली से बाजार की रौनक खत्म हो रही है। ग्राहक आने से कतराते हैं और इसका सीधा असर व्यापार पर पड़ रहा है।"
"समाचार लिखे जाने तक विभाग का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। पक्ष मिलने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।"
नगर परिषद प्रभारी सीएमओ मरकाम का कहना है कि स्टीमेट तैयार कर भेजा गया था लेकिन उसका अभी तक कुछ नहीं आया।
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