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मुजाहिदखानी में आरा मशीन पर लकड़ियों का विशाल भंडारण, वन विभाग की निगरानी पर सवाल, जांच की मांग

मुजाहिदखानी में आरा मशीन पर लकड़ियों का विशाल भंडारण, वन विभाग की निगरानी पर सवाल, जांच की मांग

केएमबी खुर्शीद अहमद
जगदीशपुर। मुजाहिदखानी क्षेत्र में संचालित एक आरा मशीन पर भारी मात्रा में लकड़ी के बोटों के कथित भंडारण और प्रतिबंधित प्रजातियों की चिराई की शिकायत सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश है। मौके की तस्वीरों के साथ गूगल मैप्स की कैमरा तस्वीरों में भी परिसर के आसपास बड़े पैमाने पर लकड़ी का भंडारण दिखाई देने की बात सामने आई है। इससे वन संपदा के कथित बड़े पैमाने पर दोहन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।बताया जा रहा है कि आरा मशीन के आसपास आम, नीम, महुआ समेत विभिन्न प्रजातियों के मोटे और ताजा लकड़ी के बोटे बड़ी संख्या में जमा हैं। इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी के भंडारण ने इसके स्रोत और वैधता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि मौके पर मौजूद प्रत्येक लकड़ी के बोटे की प्रजाति, मात्रा और उसके कटान व परिवहन से संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई जाए। शिकायत का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि आरा मशीन जंगल की परिधि के आसपास संचालित होने की बात कही जा रही है। ऐसे में आसपास के क्षेत्रों में पेड़ों की कटान, लकड़ी की ढुलाई और आरा मशीन तक पहुंचने वाली लकड़ी के स्रोत की भी जांच जरूरी है। यदि बिना अनुमति पेड़ों की कटान अथवा प्रतिबंधित प्रजातियों की चिराई की पुष्टि होती है तो मामला गंभीर पर्यावरणीय क्षति से जुड़ सकता है।
 इतने बड़े पैमाने पर लकड़ी के कथित भंडारण के बावजूद संबंधित विभागों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी, यह भी जांच का विषय है। क्षेत्रवासियों का सवाल है कि क्या आरा मशीन का नियमित निरीक्षण किया जाता है और क्या वहां मौजूद लकड़ी के स्टॉक का कभी सत्यापन हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि विभागीय निरीक्षण नियमित था तो इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी का कथित भंडारण जांच के दायरे में क्यों नहीं आया। स्थानीय लोगों ने लकड़ी के स्रोत, कटान स्थल, परिवहन, आरा मशीन के अभिलेख और संबंधित अनुमतियों की जांच के साथ निगरानी में लापरवाही की स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करने की भी मांग की है। वन विभाग और जिला प्रशासन से मौके पर तत्काल स्थलीय जांच कराने, लकड़ी के पूरे स्टॉक का सत्यापन करने तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर विधिक कार्रवाई की मांग की गई है। फिलहाल आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन सामने आई तस्वीरों में दिखाई दे रहा भारी लकड़ी भंडारण क्षेत्र की हरियाली और वन संपदा की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े करता है।

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