मृदंग के थाप और ध्रुपद के स्वरों से गूंजी जरौली कोठी, मनी पंडित झंडीलाल जी की 117वीं जयंती
बांदा।बुंदेलखंड के ग्राम पलटा में जन्मे पंडित कुदऊ सिंह घराने के देश के सुप्रसिद्ध मृदंगाचार्य स्मृति शेष पंडित झंडीलाल द्विवेदी की 117वीं जयंती के अवसर पर गुरुवार को जरौली कोठी सुदामापुरी में पंडित झंडीलाल जयंती संगीत समारोह "ध्रुपद के रंग मृदंग के संग" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बुंदेलखंड के ख्याति प्राप्त ध्रुपद गायकों व मृदंग वादकों ने आचार्य को संगीतिक भावांजलि अर्पित की। यह समारोह विगत 30 वर्षों से भाई श्री गोपाल जी व श्री लल्लू राम शुक्ला के मार्गदर्शन में अनवरत आयोजित हो रहा है, जिसका उद्देश्य लुप्त होती प्राचीन गायकी ध्रुपद व दुर्लभ वाद्य मृदंग पखावज का संरक्षण और संवर्धन है।
समारोह के मंगलाचरण में पंडित अवधेश द्विवेदी व अनमोल द्विवेदी ने सोलो मृदंग वादन प्रस्तुत किया, जिसमें हारमोनियम पर डॉ. धनंजय सिंह ने संगत की। पूर्व विभागाध्यक्ष ग्रामोदय विश्वविद्यालय चित्रकूट के श्री लल्लू राम शुक्ला ने सूल ताल की प्रस्तुति दी, जिसमें मृदंग संगति अवधेश द्विवेदी ने की। इसके बाद पंडित वीरेंद्र स्वरूप द्विवेदी ने ध्रुपद धमार की पारंपरिक बंदिश प्रस्तुत की। श्री नंदकिशोर शुक्ला ने शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया, जिसमें तबले पर मिथिलेश सिंह ने संगत की। कार्यक्रम का संचालन आचार्य लल्लू राम शुक्ला ने किया और अंत में अवधेश द्विवेदी ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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