⚡ ब्रेकिंग News

250 साल पुराना चंदनिया डीह दुर्गा मंदिर, जहां चंदा भवानी के दर्शन को उमड़ते हैं हजारों श्रद्धालु

250 साल पुराना चंदनिया डीह दुर्गा मंदिर, जहां चंदा भवानी के दर्शन को उमड़ते हैं हजारों श्रद्धालु

केएमबी ब्यूरो मुकुल बरनवाल
नवरात्र में मंदिर में उमड़ रही भक्तों की भीड़, महिलाएं चढ़ा रहीं डालिया और खोइंछा; महाष्टमी की निशा पूजा है विशेष पहचान

मंदिर की स्थापना से जुड़ी है चंदा की लोकगाथा, हर साल सैकड़ों जोड़े यहां रचाते हैं शादी

मैरवा (सीवान)। शारदीय नवरात्र के अवसर पर पूरे जिले में मां दुर्गा की भक्ति की धूम मची हुई है। सुबह से लेकर शाम तक मंदिरों और पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मैरवा रेलवे स्टेशन से उत्तर करीब 200 मीटर की दूरी पर स्थित चंदनिया डीह दुर्गा मंदिर में भी भक्तों का तांता लगा हुआ है। नवरात्र की नवमी पर श्रद्धालुओं ने मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। महिला श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में डालिया और खोइंछा चढ़ाकर अपनी श्रद्धा अर्पित की। शंख, घंटियों और मंत्रोच्चारण से मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, चंदनिया डीह दुर्गा मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई मुरादें पूरी होती हैं। यही वजह है कि नवरात्र के दौरान सीवान जिले के विभिन्न इलाकों के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ-साथ वर्षों पुरानी धार्मिक परंपराओं का भी निर्वहन किया जाता है।

दुर्गा सप्तशती के पाठ से गूंजता है मंदिर परिसर

मंदिर के पुजारी पंडित राजन जी मिश्रा के अनुसार, शारदीय नवरात्र में कलश स्थापना के साथ ही यहां विशेष पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है। नवरात्र के दौरान प्रतिदिन पंडितों के समूह द्वारा दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। वहीं, कई स्थानीय श्रद्धालु भी संकल्प लेकर नियमित रूप से पाठ करते हैं और मां दुर्गा से अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।

मंदिर में वर्षों से एक विशेष पद्धति के अनुसार पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है। महाष्टमी की रात होने वाली निशा पूजा मंदिर की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है। इस पूजा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है। नवरात्र के दिनों में मंदिर में सुबह से ही भक्तों का पहुंचना शुरू हो जाता है, जो दर्शन-पूजन के लिए कतार में खड़े रहते हैं।

करीब 250 वर्ष पुराना बताया जाता है मंदिर

मैरवा रेलवे स्टेशन से उत्तर स्थित चंदनिया डीह दुर्गा मंदिर को स्थानीय लोग करीब 250 वर्ष पुराना बताते हैं। मंदिर परिसर में मां दुर्गा के साथ हनुमान जी की प्रतिमा भी स्थापित है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, मंदिर के वर्तमान स्वरूप से पहले यहां एक इमली का वृक्ष था, जिसकी पूजा की जाती थी। धीरे-धीरे यह स्थान धार्मिक आस्था का केंद्र बन गया।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, अंग्रेजी शासन के दौरान इस क्षेत्र में अंग्रेजों द्वारा बनवाया गया एक डाक बंगला भी था। उस समय मंदिर का अधिक विस्तार नहीं हो सका। अंग्रेजी शासन की समाप्ति के बाद धीरे-धीरे मंदिर की प्रसिद्धि आसपास के इलाकों में फैलने लगी। समय के साथ चंदनिया भवानी के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती गई और नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होने लगी।

चंदा की लोकगाथा से जुड़ा है मंदिर का इतिहास

चंदनिया डीह दुर्गा मंदिर का इतिहास स्थानीय लोककथाओं में चंदा नामक युवती की गाथा से जुड़ा हुआ है। मंदिर के पुजारी पंडित विंध्याचल मिश्र के अनुसार, प्राचीन काल में चंदनिया डीह करीब 16 बीघे में फैला गढ़ था। स्थानीय दंतकथाओं में इस स्थान के इतिहास और मंदिर की स्थापना का संबंध चंदा के जीवन से बताया जाता है।

लोककथा के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी सहदेव चौधरी नामक एक साधक यहां रहते थे। उनकी पुत्री चंदा अपनी सुंदरता के लिए जानी जाती थी। धीरे-धीरे चंदा की सुंदरता की चर्चा आसपास के क्षेत्रों में फैल गई। इसी दौरान बलिया के मेठा नामक एक पहलवान ने चंदा से विवाह करने का प्रस्ताव रखा। चंदा ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद मेठा ने जबरन विवाह करने की कोशिश की।

कथा के मुताबिक, अपनी पुत्री की रक्षा के लिए सहदेव चौधरी अपने शिष्य पहलवान शिवधर के पास पहुंचे। मेठा उनका पीछा करते हुए वहां भी पहुंच गया। इसके बाद दोनों पहलवानों के बीच भीषण मल्लयुद्ध हुआ, जिसमें मेठा मारा गया। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, इस संघर्ष के बाद उसके रक्त से 16 बीघे जमीन बंजर हो गई थी।

इमली के वृक्ष के नीचे चंदा ने त्यागे प्राण

लोककथा के अनुसार, मेठा पहलवान की मृत्यु के बाद भी चंदा की परेशानियां समाप्त नहीं हुईं। कुछ समय बाद उसकी रक्षा करने वाले पहलवान शिवधर ने भी उस पर विवाह करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद चंदा ने अपनी अस्मत की रक्षा के लिए सकरा में इमली के वृक्ष के नीचे अपने प्राण त्याग दिए।

स्थानीय मान्यता के अनुसार, चंदा की मृत्यु के बाद हथुआ दरबार में रहने वाले पंडित रामचंद्र मिश्र को स्वप्न में दर्शन हुए। कथा में बताया जाता है कि चंदा ने उन्हें इमली के वृक्ष के नीचे स्थित पिंडी की पूजा करने और वहां मंदिर स्थापित करने का निर्देश दिया। इसके बाद पंडित रामचंद्र मिश्र ने उस पिंडी की पूजा-अर्चना शुरू की।

बताया जाता है कि तभी से इस स्थान पर पूजा-पाठ की परंपरा चली आ रही है। पुजारी पंडित विंध्याचल मिश्र के अनुसार, उनके परिवार की चौथी पीढ़ी यहां पूजा-अर्चना कर रही है। चंदा के नाम से ही कालांतर में यह स्थान चंदनिया डीह के नाम से प्रसिद्ध हुआ। मंदिर से जुड़ी यह कथा स्थानीय लोगों के बीच पीढ़ियों से प्रचलित है और श्रद्धालु इसे मंदिर की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।

नवरात्र में घंटों कतार में खड़े रहते हैं श्रद्धालु

नवरात्र के दौरान चंदनिया डीह दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है। भक्त मां के दर्शन के लिए घंटों कतार में खड़े रहते हैं। महिलाएं डालिया, खोइंछा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करती हैं। श्रद्धालु अपने परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की खुशहाली और जीवन की बाधाएं दूर होने की कामना करते हैं।

स्थानीय श्रद्धालु प्रभु गुप्ता और ममता देवी बताते हैं कि चंदनिया भवानी के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। दूर-दराज से लोग यहां दर्शन करने आते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्र के अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष चहल-पहल रहती है।

हर साल सैकड़ों जोड़े यहां रचाते हैं शादी

चंदनिया डीह दुर्गा मंदिर धार्मिक पूजा-अर्चना के साथ विवाह जैसे मांगलिक आयोजनों के लिए भी जाना जाता है। स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, हर साल सैकड़ों जोड़े इस मंदिर में परिणय सूत्र में बंधते हैं। यहां विवाह करने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचते हैं।

मंदिर की प्राचीनता, चंदा से जुड़ी लोकगाथा, नवरात्र की विशेष पूजा और विवाह की परंपरा ने इसे मैरवा क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में पहचान दिलाई है। शारदीय नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ इस मंदिर के प्रति लोगों की आस्था को दर्शाती है।

Post a Comment

Previous Post Next Post
BREAKING NEWS : Loading...

ताज़ा खबरें

राजनीति समाचार
राजनीति समाचार लोड हो रहे हैं...