मैरवा में लो वोल्टेज से जनजीवन बेहाल, भीषण गर्मी में पंखे-कूलर और सबमर्सिबल मोटरें हुईं बेअसर
उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश: जर्जर तार और ओवरलोड ट्रांसफार्मर बने बड़ी मुसीबत, विद्युत विभाग से स्थायी समाधान की मांग
सीवान। मैरवा नगर पंचायत क्षेत्र सहित प्रखंड के विभिन्न मोहल्लों और ग्रामीण इलाकों में इन दिनों लो वोल्टेज की गंभीर समस्या लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। आसमान से बरसती आग और भीषण गर्मी के बीच बिजली आपूर्ति रहने के बावजूद कम वोल्टेज के कारण घरों में लगे पंखे, कूलर, एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर और सबमर्सिबल मोटरें अपेक्षित ढंग से काम नहीं कर पा रही हैं। इससे हजारों उपभोक्ताओं का दैनिक जीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिजली सिर्फ नाम की आ रही है, जिससे राहत मिलने के बजाय परेशानी और बढ़ गई है।
सुबह-शाम गहरा जाता है संकट, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग
स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि सुबह और शाम के समय स्थिति सबसे अधिक नारकीय हो जाती है। पीक ऑवर्स (Peak Hours) के दौरान कई इलाकों में वोल्टेज इतना कम हो जाता है कि पंखे बेहद धीमी गति से चलते हैं, जिससे उमस भरी गर्मी में बैठना मुश्किल हो जाता है। कूलर ठंडी हवा देने के बजाय सिर्फ आवाज कर रहे हैं। सबसे गंभीर स्थिति पानी को लेकर है; वोल्टेज की कमी के कारण सबमर्सिबल मोटरें चालू ही नहीं हो पा रही हैं। इसके कारण घरों की टंकियां समय पर नहीं भर पा रही हैं, जिससे क्षेत्र में पेयजल संकट गहराने लगा है और लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
छोटे उद्योगों और कारोबारियों की टूटी कमर, उपकरणों के खराब होने का डर
लो वोल्टेज का सीधा असर स्थानीय व्यवसायियों, छोटे उद्योगों और दुकानों पर भी पड़ रहा है। मैरवा बाजार के व्यापारियों का कहना है कि वेल्डिंग मशीन, आटा चक्की, पानी की मोटर और अन्य विद्युत उपकरण पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं। इसके कारण न सिर्फ काम ठप है, बल्कि उन्हें भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। वहीं, लगातार कम और असंतुलित वोल्टेज रहने से टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन जैसे कीमती इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जलने और खराब होने की आशंका चौबीसों घंटे बनी रहती है।
साहब' को जनता की फिक्र नहीं, SDO नहीं उठाते फोन
स्थानीय उपभोक्ताओं में बिजली विभाग के रवैये को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि पिछले काफी समय से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि जब समस्या के समाधान या शिकायत के लिए विद्युत विभाग के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) को कॉल किया जाता है, तो वे फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझते। अधिकारियों की इस बेरुखी से जनता में प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
ओवरलोडिंग और जर्जर तार हैं मुख्य कारण
जानकारों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि मैरवा क्षेत्र में बिजली की मांग के अनुपात में बुनियादी ढांचा बेहद कमजोर है। कई प्रमुख स्थानों पर लगे ट्रांसफॉर्मरों पर क्षमता से अधिक लोड है। इसके अलावा, दशकों पुरानी जर्जर बिजली लाइनें और ढीले तार भी वोल्टेज ड्रॉप का मुख्य कारण हैं। गर्मियों में जब हर घर में लोड बढ़ता है, तो यह सिस्टम पूरी तरह हांफने लगता है।
तकनीकी सर्वे कराकर नए ट्रांसफार्मर लगाने की मांग
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का अविलंब तकनीकी सर्वे कराया जाए। आवश्यकता अनुसार चिन्हित जगहों पर अतिरिक्त क्षमता वाले नए ट्रांसफार्मर लगाए जाएं, पुराने और जर्जर तारों को बदला जाए तथा बिजली वितरण व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए। उपभोक्ताओं का साफ कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और विकराल रूप ले लेगी, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
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