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शासकीय महाविद्यालय बरघाट में उत्साहपूर्वक मनाई गई मुंशी प्रेमचंद की जयंती

शासकीय महाविद्यालय बरघाट में उत्साहपूर्वक मनाई गई मुंशी प्रेमचंद की जयंती

केएमबी संवाददाता
बरघाट। शासकीय महाविद्यालय बरघाट में 31 जुलाई को स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन योजना एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी एवं उर्दू साहित्य के महान कथाकार एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बी.एल. इनवाती ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद केवल एक साहित्यकार नहीं, बल्कि भारतीय समाज के संवेदनशील चिंतक और युगदृष्टा थे। उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से किसानों, मजदूरों, महिलाओं तथा समाज के वंचित वर्गों की पीड़ा को स्वर दिया और साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाया। डॉ. इनवाती ने कहा कि आज के दौर में जब समाज अनेक सामाजिक और नैतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब प्रेमचंद का साहित्य हमें सत्य, ईमानदारी, मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे प्रेमचंद की रचनाओं का गंभीर अध्ययन करें तथा उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात कर एक जिम्मेदार, संवेदनशील और जागरूक नागरिक बनने का प्रयास करें।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. पंकज गहरवार ने मुंशी प्रेमचंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनके साहित्य में निहित सामाजिक चेतना, नैतिकता और मानवीय मूल्यों पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की लेखनी अन्याय, शोषण और सामाजिक विषमताओं के विरुद्ध सदैव मुखर रही तथा आज भी हमें सत्य, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का मार्ग दिखाती है। उन्होंने प्रेमचंद के विचारों की भावना को व्यक्त करते हुए कहा— "क्या बिगाड़ के डर से ईमान की बात न कहोगे?" यह संदेश प्रत्येक व्यक्ति को निर्भीक होकर सत्य और न्याय के पक्ष में खड़े रहने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर प्रो. छत्रपाल सिंह जाटव, मानेश्वर बिसेन, डॉ. आरती भीमटे एवं प्रो. संगीता उइके ने भी अपने विचार साझा करते हुए विद्यार्थियों को मुंशी प्रेमचंद के साहित्य का अध्ययन करने तथा उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। विद्यार्थियों शुभम गोमेश्वर एवं लोकेश हुमनेकर ने मुंशी प्रेमचंद के जीवन, साहित्य तथा उनकी प्रसिद्ध कहानियों पर प्रभावशाली वक्तव्य प्रस्तुत किए, जिसकी सभी ने सराहना की।कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के नवप्रवेशित विद्यार्थियों का माय भारत पोर्टल पर पंजीयन कराया गया तथा उन्हें राष्ट्रीय सेवा योजना एवं युवा गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मुंशी प्रेमचंद के साहित्य, उनके मानवीय दृष्टिकोण तथा सामाजिक चेतना से परिचित कराना था। अंत में सभी ने उनके आदर्शों को आत्मसात करते हुए सत्य, ईमानदारी एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के मूल्यों का पालन करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में लोकेश हुमनेकर, शुभम गोमेश्वर, दीपक राहंगडाले, नवदीप, सागर मेश्राम, पायल राहंगडाले, कशिश पारधी एवं मासूम हनवत सहित छात्र-छात्राओं का सराहनीय योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन प्रो. पंकज गहरवार ने किया।

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