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हाईकोर्ट की याचिका के बाद प्रशासन ने गिराए दो आशियाने, सामाजिक संवेदनाओं पर उठे सवाल

हाईकोर्ट की याचिका के बाद प्रशासन ने गिराए दो आशियाने, सामाजिक संवेदनाओं पर उठे सवाल

केएमबी गंगा प्रसाद प्रजापति
अमेठी। तिलोई तहसील क्षेत्र में हाईकोर्ट में दायर एक रिट याचिका के अनुपालन में राजस्व विभाग और तहसील प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई के बाद सामाजिक स्तर पर कई सवाल उठने लगे हैं।खेखरुआ निवासी विजय प्रताप सिंह उर्फ राहुल की ओर से दायर याचिका के आधार पर प्रशासन ने अभियान चलाते हुए गाटा संख्या 755 पर बने खुशीराम पासी तथा गाटा संख्या 745 पर बने राजाराम पासी के आशियानों को ध्वस्त कर दिया।कार्रवाई के दौरान पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मौके पर मौजूद रही तथा ग्रामीणों की मदद से निर्माण हटाया गया। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश और राजस्व अभिलेखों के अनुरूप की गई है।हालांकि, इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सामाजिक चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जिन लोगों के आशियाने गिराए गए, वे आर्थिक रूप से कमजोर दलित परिवार हैं। उनका आरोप है कि यदि सरकारी भूमि पर कब्जा था भी, तो पहले पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए था। अचानक हुई कार्रवाई से परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए और उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो गया।ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए, लेकिन कार्रवाई में मानवीय संवेदनाओं का भी ध्यान रखा जाना आवश्यक है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि यदि किसी नागरिक की शिकायत पर गरीब परिवारों के आशियाने उजड़ते हैं, तो ऐसे मामलों में सामाजिक जिम्मेदारी और आपसी संवाद की भी आवश्यकता होती है।
फिलहाल प्रशासन ने कार्रवाई को न्यायालय के आदेश का अनुपालन बताया है, जबकि प्रभावित परिवारों में मायूसी का माहौल है। यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग कानून के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की भी मांग कर रहे हैं।

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