⚡ ब्रेकिंग News

वन अपराधों पर कार्रवाई में केवल वनरक्षक की जवाबदेही क्यों? पर्यवेक्षणीय अधिकारियों की भूमिका पर क्यों नहीं प्रश्न चिन्ह

वन अपराधों पर कार्रवाई में केवल वनरक्षक की जवाबदेही क्यों? पर्यवेक्षणीय अधिकारियों की भूमिका पर क्यों नहीं प्रश्न चिन्ह 

केएमबी जगन्नाथ मिश्रा
सुल्तानपुर। वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण की जिम्मेदारी यदि विभागीय व्यवस्था की सामूहिक जिम्मेदारी है, तो किसी एक वनरक्षक को ही पूरी विफलता का जिम्मेदार ठहराए जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है। वनरक्षक के साथ वन दरोगा, क्षेत्रीय वन अधिकारी (RFO), उड़न दस्ता तथा अन्य पर्यवेक्षणीय अधिकारियों की भी अपने-अपने स्तर पर जिम्मेदारियां निर्धारित हैं। ऐसे में यह प्रश्न महत्वपूर्ण है कि वन अपराध होने पर केवल निचले स्तर के कर्मचारी की जवाबदेही क्यों तय की जाती है।
वनरक्षक की कार्रवाई दर्ज, लेकिन अपराध होने पर पूरी जिम्मेदारी भी उसी की?
बीट प्रभारी इसौली वनरक्षक रेखा सिंह का कहना है कि उनके द्वारा पूर्व में भी अवैध आरा मशीन के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। उनका तर्क है कि जब वनरक्षक अपने स्तर से वन अपराध के विरुद्ध कार्रवाई करता है तो वह विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज होती है, लेकिन उसी क्षेत्र में यदि कोई वन अपराध हो जाए तो उसकी पूरी जिम्मेदारी भी वनरक्षक पर डाल देना उचित नहीं है। उनका कहना है कि किसी क्षेत्र की निगरानी केवल वनरक्षक की जिम्मेदारी नहीं होती। वन दरोगा द्वारा निरीक्षण, RFO द्वारा पर्यवेक्षण तथा उड़न दस्ते एवं अन्य अधिकारियों द्वारा निगरानी की व्यवस्था भी विभाग में निर्धारित है।
पर्यवेक्षणीय अधिकारियों की भूमिका पर भी लगना चाहिए पश्नचिन्ह
यदि किसी वनरक्षक के क्षेत्र में वन अपराध होता है तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि संबंधित वन दरोगा ने अपने निरीक्षण दायित्व का कितना निर्वहन किया। इसी प्रकार RFO तथा अन्य पर्यवेक्षणीय अधिकारियों की निगरानी और निरीक्षण व्यवस्था की भी समीक्षा की जानी चाहिए। सवाल यह भी है कि यदि वनरक्षक की निगरानी में अपराध होना उसकी विफलता माना जाता है, तो उस वनरक्षक की निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका का मूल्यांकन क्यों न किया जाए?
‘अपराधी पेड़ काटता है, कार्रवाई वनरक्षक करता है और तबादला भी उसी का’
वनरक्षक रेखा सिंह के अनुसार, व्यवस्था की सबसे बड़ी विडंबना यही दिखाई देती है कि अपराधी वन संपदा को नुकसान पहुंचाता है, वनरक्षक उसके विरुद्ध कार्रवाई करता है, अधिकारी निरीक्षण करते हैं और अंत में कार्रवाई के रूप में स्थानांतरण या दंड का सामना सबसे निचले स्तर के कर्मचारी को करना पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वन अपराधों पर नियंत्रण में कमी के लिए वनरक्षक को हटाना ही समाधान है, तो वन दरोगा और अन्य पर्यवेक्षणीय अधिकारियों की जिम्मेदारी का भी समान रूप से परीक्षण किया जाना चाहिए।
निष्पक्ष एवं व्यापक जांच की मांग
रेखा सिंह ने कहा कि यदि वास्तव में किसी क्षेत्र में वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रहा है तो पूरे मामले की निष्पक्ष एवं व्यापक जांच होनी चाहिए। जांच में यह देखा जाना चाहिए कि वनरक्षक से लेकर संबंधित वन दरोगा, RFO, उड़न दस्ते और अन्य अधिकारियों ने अपने-अपने पदेन दायित्वों का कितना निर्वहन किया। केवल सबसे निचले स्तर के कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई कर देने से समस्या का वास्तविक समाधान नहीं हो सकता। इससे केवल जिम्मेदारी एक कर्मचारी पर डालने का संदेश जाता है, जबकि वन अपराध नियंत्रण की व्यवस्था सामूहिक जिम्मेदारी पर आधारित है।
सामूहिक जिम्मेदारी तो जवाबदेही भी सामूहिक हो
वनरक्षक रेखा सिंह का कहना है कि यदि वन अपराध रोकना विभाग की सामूहिक जिम्मेदारी है, तो उसकी असफलता की जिम्मेदारी भी निष्पक्ष जांच के आधार पर तय होनी चाहिए। मैदान में तैनात कर्मचारी को अपराध रोकने के लिए पर्याप्त सहयोग, संसाधन और वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन मिलना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि विभागीय जवाबदेही की व्यवस्था को स्पष्ट और निष्पक्ष बनाने की मांग करना है, ताकि वन अपराधों पर वास्तविक नियंत्रण हो और कार्रवाई तथ्यों एवं जिम्मेदारी के निष्पक्ष आकलन के आधार पर हो।

Post a Comment

Previous Post Next Post
BREAKING NEWS : Loading...

ताज़ा खबरें

राजनीति समाचार
राजनीति समाचार लोड हो रहे हैं...