सीएचसी सिंहपुर की इमरजेंसी में डॉक्टर नदारद, गंभीर मरीज को घर ले जाने की सलाह का आरोप
परिजनों ने कर्मचारियों पर अभद्रता का लगाया आरोप, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
तिलोई,अमेठी, 21 अगस्त। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिंहपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शुक्रवार को करीब दोपहर दो बजे हिमांशु अवस्थी अपनी दादी को गंभीर हालत में इलाज के लिए सीएचसी सिंहपुर लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि इमरजेंसी में उस समय कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था।हिमांशु अवस्थी के मुताबिक, अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों से जब डॉक्टर के बारे में जानकारी ली गई तो बताया गया कि चिकित्सक अपने आवास पर हैं। परिजनों ने डॉक्टर से संपर्क करने के लिए फोन किया और मरीज की गंभीर स्थिति की जानकारी दी। आरोप है कि कई बार संपर्क करने के बावजूद चिकित्सक तत्काल मरीज को देखने नहीं पहुंचे।
परिजनों का यह भी आरोप है कि अस्पताल में मौजूद कुछ कर्मचारियों ने उनके साथ अभद्रता की और गंभीर हालत में मरीज को वापस घर ले जाने की बात कही। परिजनों के मुताबिक मरीज की हालत बेहद गंभीर थी और उसे तत्काल चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता थी। ऐसे में इमरजेंसी में चिकित्सक की अनुपस्थिति और मरीज को कथित तौर पर घर ले जाने की सलाह दिए जाने से अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी में यदि गंभीर मरीज पहुंचता है तो उसे तत्काल चिकित्सकीय परीक्षण और आवश्यक प्राथमिक उपचार मिलना चाहिए। यदि मरीज को उच्च केंद्र रेफर करने की आवश्यकता हो तो नियमानुसार रेफर किया जाना चाहिए, लेकिन कथित तौर पर मरीज को घर वापस ले जाने की बात कहना बेहद गंभीर विषय है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिंहपुर पर पहले भी समय-समय पर लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से करने की बात कही है। परिजनों की मांग है कि ड्यूटी के समय चिकित्सक की मौजूदगी, इमरजेंसी की व्यवस्था और कर्मचारियों के व्यवहार की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि लापरवाही या अभद्रता की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।मामले में स्वास्थ्य विभाग और संबंधित चिकित्सक का पक्ष सामने नहीं आया है। जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।
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