मन को पवित्र करने का मात्र उपाय भागवत कथा और सत्संग- पंडित उज्जल शास्त्री जी महाराज
तिलोई,अमेठी। विकासखंड सिंहपुर की ग्राम पंचायत जेहटा उसरहा गांव में बीते पांच दिनों से भागवत कथा चल रही है। श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन अयोध्यधाम से पधारे कथा व्यास पंडित उज्जल शास्त्री जी महाराज ने बताया कि भागीरथी गंगा में मनुष्य मात्र तन शुद्ध कर सकता है जबकि मन को शुद्ध करने के लिए भागवत कथा में मनुष्य को जाना पड़ेगा। कथा के पंचम दिवस भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा का मार्मिक वर्णन ने सभी को विहवल कर दिया।
अयोध्या धाम से पधारे कथा व्यास पंडित उज्जल शास्त्री जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान् बृज की रज अर्थात मिट्टी रोज खाते थे एक दिन श्री कृष्ण के भाई बलराम माँ यशोदा से शिकायत करते है तब माँ बाल कृष्ण के मुंह को देखती है तो श्री कृष्ण के मुख में पूरा ब्रह्मांड नजर आता है यह देख माँ यशोदा हैरान हो जाती है। भागवत कृष्ण गोपियों की मनोकामना की पूर्ति के लिए घर-घर माखन चुराने का बहाना बना कर जाते हैं। कथा व्यास ने प्रभु श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजन, अघासुर, बघासुर, धेनुकासुर का उद्धार व कालिया नाग की कथा का विस्तृत वर्णन किया।श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन सुन श्रोता भाव विभोर हो गए। पंडित उज्जल शास्त्री जी महाराज ने कहा कि कृष्ण ने जब प्रेम किया तो इतिहास बन गया और कुरुक्षेत्र के मैदान में पवित्र गीता का ज्ञान दिया तो भी इतिहास बन गया। कर्मयोगेश्वर श्री कृष्ण का संपूर्ण जीवन आज के मानवों के लिए शोध का विषय बना हुआ है। कथा के बीच-बीच में भजनों पर श्रोता झूमते नजर आए। इस दौरान अमित तिवारी, राम नारायण तिवारी उर्फ साधुलाल तिवारी, अनुज अवस्थी, दिनेश मिश्रा, सतीश मिश्रा, सूर्यप्रकाश मिश्रा, लाल जी मिश्रा,आलू महाराज, विमल शुक्ला, अजय शुक्ला, अतुल शुक्ला आदि लोग मौजूद रहे।
Post a Comment