आरबीएसके की पहल से मासूम दिव्यांशी को मिला नया जीवन
छिन्दवाड़ा। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के प्रभावी क्रियान्वयन से एक बार फिर एक मासूम की जिंदगी संवर गई।आदिवासी विकासखंड बिछुआ के वार्ड क्रमांक 13 में रहने वाली बालिका दिव्यांशी मिनोटे, जो जन्म से ही गंभीर विकृति “फटा तालु (क्लेफ्ट पैलेट)” से पीड़ित थी, अब पूरी तरह स्वस्थ होकर मुस्कुरा रही है। दिव्यांशी का जन्म 31 मई 2024 को जिला अस्पताल छिन्दवाड़ा में हुआ था। जन्म के बाद से ही उसे स्तनपान करने में परेशानी हो रही थी और दूध नाक से बाहर आ रहा था। नियमित टीकाकरण सत्र के दौरान आंगनवाड़ी केन्द्र इंदिरा आवास बिछुआ में एएनएम अरूणा फरकारे ने बच्ची की समस्या को पहचाना और तुरंत आरबीएसके टीम को सूचना दी।
आरबीएसके टीम के डॉ. दुर्गेश मराठा एवं एएनएम प्रागवती तुमडाम द्वारा जांच में बच्ची में क्लेफ्ट पैलेट की पुष्टि हुई। इसके बाद उसे तत्काल डीईआईसी छिन्दवाड़ा रेफर किया गया। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से निशुल्क वाहन की व्यवस्था की गई और आशा कार्यकर्ता रहिशा शेख की मदद से बच्ची को पाढर अस्पताल, बैतूल में भर्ती कराया गया।
01 नवंबर 2025 को विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा दिव्यांशी का सफल ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद अब बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है, सामान्य रूप से खाना खा रही है और बोलना भी सीख रही है। बच्ची की मुस्कान ने पूरे परिवार को खुशी से भर दिया है। इस सफल उपचार में प्रभारी डीआईसी मैनेजर डॉ. संदीप कटारिया एवं सीबीएमओ डॉ. निलेश सिडाम का विशेष योगदान रहा। वहीं, डॉ. दुर्गेश मराठा के प्रयासों की भी सराहना की गई।
डॉ. मराठा ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि कटे-फटे होंठ एवं तालु जैसी जन्मजात समस्याओं का समय पर इलाज संभव है।उन्होंने बताया कि आरबीएसके के तहत यह उपचार पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध है। सही समय पर सर्जरी होने से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है तथा वे आत्मविश्वास के साथ समाज में आगे बढ़ सकते हैं।
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