जनजागृति के लिए चित्रकूट में निकाली गई सुंदरकांड महाअभियान चेतना यात्रा
लखनऊ। ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति की ओर से सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल की अगुआई में चित्रकूट पावन तीर्थ परिसर रामघाट में सैकड़ों की संख्या में मातृ शक्तियों ने सामूहिक सुंदरकांड का पाठ 10 मार्च को किया। गुरुवार को लखनऊ पहुंच कर सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल ने बताया कि जनजागृति के लिए सुंदरकांड महा अभियान चेतना यात्रा भी केसरिया ध्वज के साथ चित्रकूट में निकाली गई। इसमें सभी मातृशक्तियां, सुंदरकांड महा अभियान के लिए निर्धारित पीले रंग की साड़ी पहन कर पूरे उत्साह के साथ शामिल हुईं। इस अनुष्ठान में भाजपा के वरिष्ठ अग्रज भी भक्तिभाव से शामिल हुए।
चित्रकूट में आयोजित सुंदरकांड आध्यात्मिक अनुष्ठान में सपना गोयल ने संदेश दिया कि चित्रकूट का पावन तीर्थ भक्ति, मर्यादा और प्रकृति के साथ सामंजस्य का संदेश देती है। सनातनियों को भी प्रभु राम की तरह अपने कर्तव्यों के प्रति जागृत होना चाहिए। जिस प्रकार सूरज, नदी और वृक्ष तक अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं उसी प्रकार मानव को भी सत्य पथ का अनुसरण करते हुए अपने और अपने समाज के उत्थान में समर्पित हो जाना चाहिए।
सुंदरकांड के नियमित पाठ से व्यक्ति को सही गलत का ज्ञान होता है वहीं उसका आत्मबल जागृत होता है। सुंदरकांड का नियमित पाठ, हर तरह के कष्ट, भय और अनिष्ट की आशंका को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर अपने नाम के अनुरूप जीवन में सुख, समृद्धि और शुभता लाता है।
सपना गोयल के अनुसार चित्रकूट वही पावन तीर्थ भूमि है जहां चौदह वर्ष के वनवास काल में ग्यारह वर्षों तक भगवान राम, उनकी पत्नी देवी सीता और अनुज लक्ष्मण ने निवास किया था।
इसके साथ ही यह ऋषि अत्रि और सती अनसूया के मिलन की पावन भूमि भी है। इसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश के अवतारों का निवास होने का श्रेय भी दिया जाता है। भगवान श्री राम के चरण स्पर्श से पवित्र चित्रकूट तीर्थ में महाकाव्य श्री रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ने अपने जीवन के कई वर्ष व्यतीत किये थे।
गोस्वामी तुलसीदास के अनुसार चित्रकूट के वनों में रहते हुए श्रीराम ने आसुरी शक्तियों का नाश करने के लिए दिव्य शक्तियां प्राप्त की थीं। ऐसे पावन चित्रकूट तीर्थ में प्रवाहित होने वाली पावन मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित रामघाट तीर्थ भक्तों के पापों को मुक्ति का अवसर प्रदान कर उन्हें आध्यात्मिक और सांसारिक दोनों क्षेत्रों में उन्नति प्रदान करता है।
जहां प्रयागराज को तीर्थों का राजा कहा जाता है, वहीं चित्रकूट को सभी तीर्थों का तीर्थ माना जाता है। ऐसी पावन भूमि को नमन करते हुए यह कामना करते हैं कि समस्त सनातनी संगठित हों और सुंदरकांड के माध्यम से अपना जीवन और अपने समाज को सुंदर बनाएं।
सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल, द्वारा उत्तर प्रदेश ही नहीं वरन राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से “सुंदरकांड महा अभियान, भारत वर्ष की बने पहचान” का संचालन किया जा रहा है। उनका एकमात्र लक्ष्य है कि संतों और ऋषियों की पावन भूमि, “भारत” एक बार पुन: “विश्व गुरु” के रूप में प्रतिष्ठित हो।
भारत उत्थान के इस महा उद्देश्य की पूर्ति हेतु ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति की ओर से प्रतिदिन सुंदरकांड पाठ के साथ-साथ प्रत्येक सप्ताह मंगलवार और शनिवार को नजदीकी मंदिरों में सामूहिक सुंदरकांड का आयोजन, “मातृ शक्तियों” द्वारा वृहद स्तर पर करवाया जा रहा है।
बिना किसी सरकारी या निजी सहयोग के 10 मार्च 2024 को महिला दिवस के उपलक्ष्य में पांच हजार से अधिक मातृ शक्तियों द्वारा लखनऊ के झूलेलाल घाट पर सामूहिक सुंदरकांड का भव्य अनुष्ठान सम्पन्न करवाया गया था। इसकी वर्षगांठ के अवसर पर चित्रकूट धाम में वृहद सुंदरकांड अनुष्ठान 10 मार्च को सम्पन्न करवाया गया है।
इस क्रम में राष्ट्रीय स्तर पर तीर्थाटन का सिलसिला भी शुरू किया गया है।
इसके तहत उत्तराखंड कोटद्वार के प्राचीन सिद्धबली मंदिर, नैमिषारण्य तीर्थ, काशी विश्वनाथ मंदिर, हर की पौड़ी हरिद्वार, रुड़की महादेव मंदिर और प्रयागराज के लेटे हुए हनुमान मंदिर परिसर एवं कानपुर के आनंदेश्वर महादेव मंदिर के गंगा जी घाट परिसर में भी भव्य सुंदरकाण्ड का पाठ सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है।
इसके साथ ही बीते साल 11 सितम्बर से अयोध्या जी में प्रभु राम जी के जन्मभूमि परिसर में भी, मासिक सुंदरकांड पाठ का सिलसिला शुरू हो गया है। दूसरी ओर “सेवा परमो धर्म:” को बीज मंत्र मानते हुए दरिद्र नारायण की सेवा के भाव से जाड़ों में कम्बल वितरण और विभिन्न पावन अवसरों पर भंडारों का आयोजन भी करवाया जा रहा है। इसके साथ ही सावन माह में वृहद कावड़ सेवा भी की जा रही है।
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