गांव की राजनीति में उबाल, चुनाव टले तो किसके हाथ रहेगी पंचायत? प्रधानी की तैयारी में जुटे दावेदार निराश
मौजूदा प्रधानों ने मांगा कार्यकाल विस्तार , गौरव शिवराज ने DM को सौंपा ज्ञापन
अमेठी। पंचायत चुनाव समय पर न होने की चर्चा तेज होते ही गांव की राजनीति गरमा गई है। एक तरफ मौजूदा प्रधान और पंचायत प्रतिनिधि अपना कार्यकाल बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ जो लोग नई प्रधानी की तैयारी में महीनों से जुटे हैं, उनमें निराशा, गुस्सा और बेचैनी बढ़ती जा रही है।
इसी बीच अखिल भारतीय प्रधान संगठन की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी अमेठी को सौंपा गया है। ज्ञापन में साफ कहा गया है कि अगर सरकार समय पर पंचायत चुनाव नहीं करा सकती, तो मौजूदा प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों का समय बढ़ा दिया जाए, ताकि गांवों में विकास कार्य और व्यवस्था प्रभावित न हो।संगठन का कहना है कि चुनाव टालकर गांवों की सरकार प्रशासकों के भरोसे छोड़ना सही नहीं होगा। उनका तर्क है कि चुने हुए प्रतिनिधियों की जगह अधिकारियों के हाथ में पंचायत देने से जनता की सीधी भागीदारी कम हो जाएगी और विकास कार्यों पर भी असर पड़ेगा।लेकिन दूसरी ओर, गांव-गांव में वे लोग भी काफी परेशान हैं जो इस बार प्रधानी चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। कई संभावित उम्मीदवारों ने महीनों से जनसंपर्क, बैठकों, समर्थकों की तैयारी, गांवों में दौड़-धूप और आर्थिक खर्च शुरू कर दिया है। अब चुनाव टलने की खबरों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।गांव के आम लोगों में भी इस मुद्दे को लेकर नाराजगी और विरोध का माहौल देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि पंचायत चुनाव गांव की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और इसे समय पर होना चाहिए। यदि चुनाव में देरी होती है, तो इसका सीधा असर गांव की राजनीति, विकास और जनभावना पर पड़ेगा। फिलहाल गांवों में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि अगर चुनाव समय पर नहीं होंगे, तो सरकार क्या करेगी — नए चुनाव कराएगी, प्रधानों का समय बढ़ाएगी या पंचायतों को प्रशासकों के हवाले करेगी। अब सबकी नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी
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