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जालौन BSA के काले कारनामे का एक और खेल उजागर, विद्यालय में नामांकन शून्य, शिक्षक घर बैठे ले रहे वेतन


जालौन BSA के काले कारनामे का एक और खेल उजागर, विद्यालय में नामांकन शून्य, शिक्षक घर बैठे ले रहे वेतन

केएमबी ब्यूरो ब्रजेश बादल
 जालौन। जनपद में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। “जीरो टॉलरेंस” नीति के दावों के बीच जिले में भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। ताजा मामला कुंदनपुरा गांव के एक प्राथमिक विद्यालय का है, जहां जुलाई से मार्च तक एक भी छात्र का नामांकन नहीं हुआ, फिर भी विद्यालय कागजों में संचालित दिखाया जा रहा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस विद्यालय में तीन शिक्षक तैनात हैं। इनमें से एक सहायक अध्यापिका, राधा साहू, कभी-कभार विद्यालय खोलकर बैठती हैं, जबकि अन्य दो—प्रधानाध्यापक और एक सहायक अध्यापक—अधिकतर अनुपस्थित रहते हैं। आरोप है कि ये शिक्षक कभी-कभी आकर उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर चले जाते हैं या फिर घर पर ही रजिस्टर मंगवाकर अपनी हाजिरी दर्ज करा लेते हैं।
सबसे गंभीर सवाल बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि पिछले एक वर्ष में न तो बीएसए (बेसिक शिक्षा अधिकारी) और न ही एबीएसए (खंड शिक्षा अधिकारी) ने इस विद्यालय का निरीक्षण किया। इससे यह आशंका गहराती है कि विभागीय स्तर पर निगरानी पूरी तरह से कमजोर है। यहां तक कि विभाग को यह तक स्पष्ट जानकारी नहीं है कि जिले में कितने विद्यालय सक्रिय हैं, कहां कितने छात्र पढ़ रहे हैं और कितने शिक्षक कार्यरत हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि वीआरसी स्तर पर भी गड़बड़ी व्याप्त है। कुछ एबीएसए पर आरोप है कि वे “नजराना” के आधार पर शिक्षकों की ड्यूटी तय करते हैं। जो शिक्षक इस व्यवस्था का पालन करते हैं, वे बिना विद्यालय आए भी नियमित वेतन प्राप्त कर रहे हैं। वहीं, अल्प वेतन पाने वाले शिक्षा मित्रों पर सख्ती बरती जाती है और उनसे नियमित उपस्थिति की अपेक्षा की जाती है।
इस असमानता और कथित भ्रष्टाचार से शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है। जहां एक ओर सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने की बात कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत इसके विपरीत नजर आ रही है। बिना छात्रों के विद्यालय और अनुपस्थित शिक्षक इस बात का प्रमाण हैं कि व्यवस्था में कहीं न कहीं बड़ी खामी है।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाएगी और बच्चों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले पर क्या कदम उठाता है और क्या दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं।

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