एस फाउंडेशन परियोजना के तहत 18 गांवों में 2400 किलोग्राम तुअर बीज का वितरण
छिंदवाड़ा। कृषि उत्पादन बढ़ाने, वर्षा आधारित खेती को सशक्त बनाने तथा मृदा स्वास्थ्य सुधार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यस फाउंडेशन समर्थित समेकित ग्रामीण आजीविका परियोजना के अंतर्गत बिछुआ विकासखंड के 18 गांवों में किसानों को तुअर (अरहर) बीज का वितरण किया गया।परियोजना के प्रथम वर्ष में कुल 2400 किलोग्राम तुअर बीज किसानों को उपलब्ध कराया गया। वितरण किया गया बीज राष्ट्रीय बीज निगम, भोपाल से प्राप्त उन्नत किस्म जीआरजी-152 (भीमा) का है, जो वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
परियोजना के तहत किसानों को दलहनी फसलों के महत्व, मृदा उर्वरता संवर्धन तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के संबंध में भी जानकारी प्रदान की गई। विशेषज्ञों के अनुसार तुअर जैसी दलहनी फसलें वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होती हैं, जिससे आगामी फसलों को भी लाभ मिलता है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जीआरजी-152 (भीमा) किस्म से उचित कृषि प्रबंधन अपनाने पर लगभग 8 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। परियोजना के माध्यम से किसानों को उन्नत बीजों के उपयोग, बेहतर फसल प्रबंधन तथा जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
एस फाउंडेशन एवं एन. एम. सद्गुरु वाटर एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा संचालित यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, दलहन उत्पादन को प्रोत्साहित करने तथा क्षेत्र में टिकाऊ कृषि एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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