सोशल मीडिया प्रकरण में नया मोड़, एडिटेड पोस्ट व फर्जी आईडी की जांच की मांग
अमेठी। सोशल मीडिया पर कथित फर्जी आईडी, भ्रामक पोस्ट एवं प्रतिष्ठा प्रभावित करने वाली सामग्री को लेकर शिकायत करने वाले मान्यता प्राप्त पत्रकार एवं उत्तर प्रदेश जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के प्रदेश संगठन मंत्री गंगेश पाठक ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष साइबर एवं तकनीकी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि विगत लगभग डेढ़ वर्ष से उनके नाम एवं छवि को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की भ्रामक सामग्री प्रसारित की जा रही है, जिसकी शिकायत विभिन्न पुलिस, प्रशासनिक एवं साइबर अधिकारियों से की जा चुकी है।
गंगेश पाठक ने बताया कि प्रकरण के संबंध में थाना जगदीशपुर में एफआईआर दर्ज हो चुकी है तथा मामले की जांच जारी है। उनका आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद उनके नाम से कथित फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर, पोस्टों को संपादित अथवा संदर्भ से अलग प्रस्तुत कर विभिन्न स्तरों पर शिकायतें भेजी जा रही हैं। उनके अनुसार यह भी जांच का विषय है कि जिन नामों से शिकायतें प्रेषित की जा रही हैं, वे वास्तव में उन्हीं व्यक्तियों द्वारा तैयार की गई हैं अथवा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा तैयार कर उनके नाम से भेजी जा रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से उन पोस्टों एवं तस्वीरों की जांच की मांग की है, जिनमें भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीरों के साथ कथित रूप से संपादित सामग्री प्रसारित किए जाने का दावा किया गया है। पाठक का कहना है कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित फोटो या पोस्ट का मूल स्रोत क्या है, उसमें किसी प्रकार का संपादन हुआ है या नहीं, उसे किस अकाउंट से प्रसारित किया गया तथा उसके आधार पर शिकायतें किन परिस्थितियों में प्रस्तुत की गईं।
पाठक ने कहा कि यदि उनके नाम से किसी फर्जी अकाउंट का संचालन किया जा रहा है अथवा किसी सामग्री को संपादित कर प्रसारित किया गया है तो उसकी भी तकनीकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने मूल सोशल मीडिया अकाउंट, आईपी विवरण, डिजिटल लॉग, एडिटेड सामग्री तथा शिकायतों के स्रोत की जांच कर वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी व्यक्ति को शिकायत करने और अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन यदि किसी के नाम, पहचान अथवा सोशल मीडिया प्रोफाइल का दुरुपयोग कर भ्रामक सामग्री प्रसारित की जाती है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उनका कहना है कि वे मामले के निष्पक्ष खुलासे तक अपनी बात विधिसम्मत तरीके से संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखते रहेंगे तथा सत्य सामने लाने के प्रयासों से पीछे नहीं हटेंगे। उल्लेखनीय है कि मामला वर्तमान में जांच के स्तर पर है। किसी भी पक्ष के आरोपों अथवा दावों की पुष्टि अभी तक किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है। अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड एवं तकनीकी परीक्षण के उपरांत ही निर्धारित होगा।
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