मोहर्रम की नवी तारीख यौमें अआसुरा की तैयारी की याद
देवरिया। इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम की 9वीं तारीख (तासूआ) का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है। इसे मुहर्रम के 10वें दिन 'यौम-ए-आशूरा' की तैयारी और उससे जुड़े धार्मिक उपवास (रोज़ा) के लिए सबसे प्रमुख दिन माना जाता है। इस्लामिक परंपराओं के अनुसार, मुहर्रम की 9वीं तारीख की अहमियत इस प्रकार है- रोज़ा रखने की परंपरा पैगंबर मुहम्मद ने मुसलमानों को मुहर्रम के 10वें दिन (आशूरा) के साथ-साथ 9वीं तारीख का भी रोज़ा रखने की हिदायत दी थी। इसका उद्देश्य अन्य धर्मों की परंपराओं से अलग अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाए रखना था। 9वीं मुहर्रम का रोज़ा 10वें दिन (आशूरा) के रोज़े के लिए एक आध्यात्मिक भूमिका तैयार करता है। आशूरा का दिन इस्लाम में बहुत पवित्र माना जाता है, जो हज़रत मूसा (मूसा अलैहिस्सलाम) को फिरौन से मिली मुक्ति और पैगंबर मुहम्मद के नवासे हज़रत इमाम हुसैन की शहादत दोनों की याद दिलाता है ।गुनाहों की माफी: हदीस के अनुसार, मुहर्रम के महीने में रोज़ा रखना रमजान के बाद सबसे उत्तम माना गया है। 9वीं और 10वीं मुहर्रम का रोज़ा रखने से पिछले साल के गुनाहों के प्रायश्चित और माफी का अवसर मिलता है।क्षेत्र के खुखुन्दू, भटहर, खिरसर, सिसवार, जैतपुरा, जुआफर, खजूरी, नरौली खेम, नरौली भीखम, तेनुआ, मरहवा, धनौती मैं अकीदत के साथ मनाया जा रहा है। ताजी आधार अपने ताजिए के लिए चौकिया को युद्ध स्तर पर सफाई कर रहे हैं। अगले दिन कर्बला के मैदान में इनामी प्रतियोगिताओं का भी आयोजन रखा गया है।
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